पेरिस: पाकिस्तान के रक्षा दिवस के मौके पर पेरिस में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में देश की सैन्य वीरता की आधिकारिक कहानी को चुनौती दी गई। कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने पाकिस्तान सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए और कहा कि उसकी नीतियों ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK), अफगानिस्तान और पाकिस्तान में लंबे समय से जारी अस्थिरता को बढ़ावा दिया है।
12 देशों के प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया
यह कार्यक्रम निर्वासित पाकिस्तानी पत्रकार ताहा सिद्दीकी द्वारा स्थापित डिसिडेंट क्लब की ओर से पेरिस स्थित पाकिस्तान दूतावास के बाहर आयोजित किया गया। आयोजकों के अनुसार, फ्रांस, पाकिस्तान, भारत, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, स्विट्जरलैंड और अमेरिका समेत 12 देशों के प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया।
आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम के लिए जानबूझकर 6 सितंबर का दिन चुना गया, क्योंकि इसी दिन पाकिस्तान 1965 के युद्ध की याद में रक्षा दिवस मनाता है और अपने सशस्त्र बलों का सम्मान करता है।
पेरिस में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने सैन्य रिकॉर्ड का एक वैकल्पिक पक्ष सामने रखने का प्रयास किया। इसमें कथित जबरन गुमशुदगी, सामूहिक दंड, प्रॉक्सी हिंसा और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों पर चर्चा हुई।
अफगान और पाकिस्तानी प्रतिभागियों ने सैन्य अभियानों और ऐसी नीतियों का जिक्र किया, जिनके बारे में उनका कहना था कि उन्होंने असुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ाया। वहीं, भारतीय वक्ताओं ने दशकों से जारी संघर्ष की वजह से आम नागरिकों पर पड़े प्रभाव और सशस्त्र समूहों को कथित समर्थन का मुद्दा उठाया।
पाकिस्तानी सेना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग
कार्यक्रम में गवाही और चर्चा भी हुई। प्रतिभागियों ने पाकिस्तानी सेना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने यूरोपीय संस्थानों, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि अन्य देशों की सुरक्षा बलों पर लगे आरोपों की तरह इन आरोपों की भी गंभीरता से जांच की जाए।
प्रतिभागियों ने पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक आलोचकों की स्थिति पर भी ध्यान आकर्षित किया। आयोजकों के अनुसार, पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान का विरोध करने के कारण ऐसे कई लोगों को दबाव का सामना करना पड़ा और उन्हें निर्वासन के लिए मजबूर होना पड़ा।
पीओके में 100 से ज्यादा मौतों और 500 अफगान नागरिकों के मारे जाने का दावा
आयोजकों ने आगे आरोप लगाया कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 100 से अधिक लोग मारे गए, जबकि इस साल अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना द्वारा 500 से अधिक नागरिकों की हत्या की गई।
हालांकि, ये आंकड़े और आरोप कार्यक्रम में आयोजकों एवं प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत किए गए दावे हैं। खबर में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख नहीं किया गया है।
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