बाराबंकी : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी बिसात बिछनी शुरु हो चुकी है। राजनीतिक गलियारों में चुनावी माहौल धीरे-धीरे अपने रंग में दिखाई दे रहा। राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारी शुरु कर ली है। इसी बीच TNP News के खास कार्यक्रम ‘27 की सत्ता’ की टीम पहुंची है बाराबंकी जिले की चर्चित जैदपुर विधानसभा सीट पर, जहां जमीन पर चुनावी माहौल के बीच जनता के मन की बात को समझने का प्रयास किया है।

मसौली और सिद्धौर विधानसभा के परिसीमन से बनी जैदपुर विधानसभा सीट

बाराबंकी की जैदपुर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की उन सीटों में शामिल है, जहां इतिहास, सामाजिक समीकरण और सियासत तीनों की अलग पहचान दिखाई देती है। परिसीमन के बाद मसौली और सिद्धौर विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बनी जैदपुर सीट आज प्रदेश की चर्चित विधानसभा सीटों में गिनी जाती है। छह थानों में फैली यह विधानसभा कभी अफीम की खेती और तस्करी के लिए जानी जाती थी।

काले सोने के नाम से मशहूर अफीम के कारण यह इलाका कभी तस्करी के नेटवर्क को लेकर सुर्खियों में रहा। लेकिन समय के साथ यहां की तस्वीर बदली। अब यह क्षेत्र इंटरनेशनल बाजार में पहचान रखने वाले स्टॉल और दुपट्टा उद्योग, उन्नत खेती और हजारों हेक्टेयर में फैले आम के बागानों के लिए जाना जाता है। यहां के आम देश ही नहीं बल्कि विदेशों के बाजारों तक पहुंचते हैं।

जैदपुर: बाराबंकी की वीआईपी विधानसभा सीट

जैदपुर विधानसभा की पहचान सिर्फ सामाजिक समीकरणों से नहीं बल्कि राजनीतिक विरासत से भी जुड़ी रही है। इस क्षेत्र से जुड़े कई नेताओं ने प्रदेश और केंद्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पुराने समय में मसौली विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था। यही वजह रही कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तक इस इलाके में पहुंच चुके हैं। कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने इस क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित किया है। मोहसिना किदवई जैसे नेताओं ने प्रदेश और केंद्र सरकारों में मंत्री पद संभाला।

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की अलग पहचान

जैदपुर विधानसभा धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध क्षेत्र है। बीबीपुर में पीलिया बीमारी से जुड़ी मान्यता वाला कुआं और मंदिर मौजूद है। मंजिठा में नाग देवता का प्राचीन मंदिर है। वहीं बासा शरीफ में सैयद शाह अब्दुल रज्जाक की प्रसिद्ध दरगाह है। जैदपुर में बड़ी और छोटी सरकार के तालुकेदारों द्वारा बनवाई गई पुरानी हवेलियां, इमामबाड़े और ऐतिहासिक इमारतें आज भी क्षेत्र की विरासत को दिखाती हैं। यहां दुर्गा पूजा, होली और मोहर्रम जैसे त्योहार बड़े स्तर पर मनाए जाते हैं।

मसौली और बड़ागांव क्षेत्र में किदवई परिवारों की पुरानी राजनीतिक और सामाजिक पहचान आज भी दिखाई देती है। खूबसूरत हवेलियां और आम के बाग इस क्षेत्र की खास पहचान हैं। आजादी की लड़ाई के दौर में भी यह इलाका क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र रहा था। जैदपुर की सीमा राजधानी लखनऊ के अलावा गोंडा, अयोध्या और बहराइच से जुड़ती है।

जैदपुर की राजनीति: किदवई बनाम वर्मा की पुरानी लड़ाई

मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी मौजूदगी वाली इस सीट पर लंबे समय से दिलचस्प राजनीतिक मुकाबले देखने को मिले हैं। एक दौर में स्वर्गीय बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा और फरीद महफूज किदवई के बीच राजनीतिक मुकाबला चर्चा में रहा। दोनों नेताओं ने अलग-अलग चुनावों में एक-दूसरे को चुनौती दी और जीत हासिल की। वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, आजादी के बाद मसौली क्षेत्र में कांग्रेस का दबदबा रहा। 1967 में जामिल उर रहमान किदवई विधायक बने। इसके बाद 1969 में मुस्तफा कामिल किदवई और 1974 में मोहसिना किदवई विधायक बनीं। मोहसिना किदवई बाद में राज्य और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहीं।

जैदपुर विधानसभा का सामाजिक समीकरण

जैदपुर विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है और इसका विधानसभा नंबर 269 है। यह बाराबंकी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। वर्तमान विधायक समाजवादी पार्टी के गौरव कुमार हैं। सीट के सामाजिक समीकरण में मुस्लिम, कुर्मी, रावत, यादव, गौतम और अन्य पिछड़े वर्गों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

हालिया गैर-आधिकारिक चुनावी आकलनों के अनुसार

मुस्लिम मतदाता करीब 18 प्रतिशत
कुर्मी मतदाता करीब 18 प्रतिशत
रावत मतदाता करीब 18 प्रतिशत
यादव मतदाता करीब 14 प्रतिशत
गौतम समुदाय करीब 10 प्रतिशत

सवर्ण और अन्य पिछड़े वर्गों की भी मौजूदगी

हालांकि निर्वाचन आयोग जातिवार मतदाता सूची जारी नहीं करता, इसलिए ये आंकड़े आधिकारिक जातिगत वोटर डेटा नहीं हैं। 2026 की वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जैदपुर में मतदाता सूची में बड़ा बदलाव दर्ज हुआ है।

2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार जैदपुर विधानसभा में कुल मतदाता 3,62,190, वहीं 2025 में मतदाता संख्या:, 4,05,479 थी। यानी करीब: 43,289 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई। हालांकि इस बदलाव को किसी राजनीतिक दल या समुदाय के पक्ष या विपक्ष में सीधे जोड़ना संभव नहीं है।

2022 विधानसभा चुनाव: कांटे की टक्कर

2022 विधानसभा चुनाव में जैदपुर सीट पर बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के गौरव कुमार वोट: 1,13,558 BJP के अंबरीश रावत वोट: 1,10,576 जीत का अंतर: 2,982 वोट से कांग्रेस के तनुज पुनिया को 28,689 वोट मिले, जबकि BSP की उषा सिंह को 18,400 वोट मिले। SP ने करीब 1.07 प्रतिशत वोट शेयर के अंतर से यह सीट जीती।

2012 से 2022 तक बदली जैदपुर की राजनीति

जैदपुर सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और पहला विधानसभा चुनाव 2012 में हुआ। 2012 विधानसभा चुनाव SP के रामगोपाल: 76,869 वोट, BSP के वेद प्रकाश रावत: 53,828 वोट, कांग्रेस के बैजनाथ रावत: 52,010 वोट, SP ने 23,041 वोट से जीत दर्ज की।

2017 विधानसभा चुनाव

BJP के उपेंद्र सिंह: 1,11,064 वोट, कांग्रेस के तनुज पुनिया: 81,883 वोट, BSP की मीता गौतम: 48,095 वोट, BJP ने 29,181 वोट से जीत दर्ज की।

2019 उपचुनाव

उपेंद्र सिंह के सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में: SP के गौरव कुमार: 78,172 वोट, BJP के अंबरीश:, 74,007 वोट, कांग्रेस के तनुज पुनिया: 43,983 वोट, SP ने 4,165 वोट से जीत हासिल की।

2024 लोकसभा चुनाव में जैदपुर का रुझान

2024 लोकसभा चुनाव में जैदपुर विधानसभा खंड बाराबंकी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा था। यहां: कांग्रेस के तनुज पुनिया: 1,62,578 वोट, BJP की राजरानी रावत: 1,03,445 वोट, BSP के शिव कुमार दोहरे: 6,291 वोट कांग्रेस उम्मीदवार को BJP पर 59,133 वोट की बढ़त मिली।

हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार, गठबंधन और स्थानीय मुद्दे अलग होते हैं, इसलिए इसे 2027 विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता। 2027 में जैदपुर का चुनावी गणित करीब 3.62 लाख मतदाताओं वाली जैदपुर विधानसभा में 2027 का चुनाव कई फैक्टरों पर निर्भर करेगा।

मुख्य मुद्दे होंगे:

मुस्लिम, कुर्मी, रावत और यादव मतदाताओं का रुझान
अनुसूचित जाति समुदायों का मतदान पैटर्न
BSP और अन्य दलों का प्रदर्शन
उम्मीदवारों की लोकप्रियता
स्थानीय विकास के मुद्दे
महंगाई, रोजगार, सड़क, बिजली और पानी जैसे मुद्दे
नई मतदाता सूची का प्रभाव

 

2027 में क्या होगा चुनावी गणित?

करीब 3.62 लाख मतदाताओं वाली जैदपुर विधानसभा सीट पर 2027 का चुनाव कई अहम फैक्टरों से प्रभावित होगा। मुस्लिम, कुर्मी, रावत और यादव मतदाताओं का रुझान, अनुसूचित जाति समुदायों के भीतर मतदान पैटर्न, BSP और अन्य दलों की भूमिका, उम्मीदवारों की पकड़, गठबंधन की स्थिति, मतदान प्रतिशत और 2026 की नई मतदाता सूची जैसे मुद्दे चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि इन सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर चुनाव परिणाम का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। जैदपुर में मुकाबले की दिशा उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के अंतिम फैसले से तय होगी। यहां मुकाबला अक्सर सामाजिक समीकरणों, उम्मीदवारों की पकड़ और चुनावी रणनीति के मेल से तय होता रहा है। 2027 में भी इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प रहने की संभावना है, लेकिन चुनाव परिणाम मतदाताओं के अंतिम फैसले पर निर्भर करेंगे।

 

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