लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के तीन बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने जा रहे हैं। तीनों विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों को भाजपा में शामिल होने की प्रमुख वजह बताया है। इस घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
राकेश प्रताप सिंह बोले- जनता ने भाजपा में जाने के लिए प्रेरित किया
अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि उनके क्षेत्र की जनता ने उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है और समर्थन का भरोसा दिया है। उन्होंने दावा किया कि बूथ स्तर पर चुनाव में जीत-हार के लिए काम करने वाले करीब 98 प्रतिशत लोग भी उनके साथ सपा छोड़कर भाजपा में शामिल होंगे।
राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि उनके विरोधियों के लिए कोई खास संदेश नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान राम उन पर भी अपनी कृपा बनाए रखें। भाजपा में शामिल होने के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, पंकज चौधरी समेत कई नेताओं और विधायकों के मौजूद रहने की बात भी कही गई है।
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री जयवीर सिंह ने इस घटनाक्रम को बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में दूसरे नेता भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अभी से बेचैनी क्यों हो रही है।
विनोद चतुर्वेदी ने गिनाए भाजपा में जाने के कारण
कालपी से सपा के बागी विधायक विनोद चतुर्वेदी ने कहा कि मोदी और योगी सरकार के विकास कार्यों तथा उनके नेतृत्व पर भरोसे के कारण वह भाजपा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बुंदेलखंड में पिछले नौ वर्षों के दौरान विकास के कई काम हुए हैं, जबकि पहले की सरकारों ने इस क्षेत्र की अनदेखी की थी।
चतुर्वेदी ने कहा कि भाजपा सरकार की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों को मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में राम मंदिर जाने के मुद्दे पर आस्था को ठेस पहुंचने की स्थिति में सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने भाजपा में ब्राह्मण समाज की उपेक्षा होने के दावों को भी खारिज किया और कहा कि पार्टी में ब्राह्मणों का सम्मान है।
भाजपा के लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की संभावना पर उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि ऐसा जरूर होगा।
2024 के राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ी थी सपा से दूरी
राकेश प्रताप सिंह ने गौरीगंज सीट से 2012, 2017 और 2022 में जीत दर्ज की थी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को 6,963 वोटों से हराया था। वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने के बाद सपा से उनके मतभेद बढ़ गए थे। जून 2025 में पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था।
अभय सिंह वर्ष 2012 और 2022 में विधायक चुने गए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने आरती तिवारी को 13,079 वोटों से हराया था। वहीं, विनोद चतुर्वेदी ने 2007 और 2022 में कालपी विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। वर्ष 2022 में उन्होंने निषाद पार्टी के छोटेलाल सिंह को 2,816 वोटों से हराया था।
जून 2025 में सपा ने राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और मनोज कुमार पांडेय को निष्कासित किया था। मनोज कुमार पांडेय ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के लिए सपा के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दिया था। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए और 10 मई 2026 को योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए गए।
यूपी चुनाव 2027 से पहले भाजपा-सपा की सियासी जंग तेज
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं के दल बदलने की घटनाएं राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं। सपा के तीन बागी विधायकों का भाजपा में शामिल होना अखिलेश यादव की पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है। वहीं, भाजपा इसे अपने संगठन और जनाधार को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि इन नेताओं के भाजपा में आने से उनके विधानसभा क्षेत्रों में क्या बदलाव होता है और इसका असर 2027 के चुनावी समीकरणों पर कितना पड़ता है।
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