bahraich sadar assembly election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर प्रदेश की सियासी बिसात धीरे-धीरे सजने लगी है। राजनीतिक दल जहां अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं, वहीं चुनावी माहौल भी अब जमीन पर नजर आने लगा है। इसी क्रम में TNP News के खास कार्यक्रम ‘27 की सत्ता’ की टीम पहुंची बहराइच जिले की चर्चित सदर विधानसभा सीट पर, जहां हमने जमीनी हकीकत को समझने और जनता के मन की बात जानने की कोशिश की।
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में शामिल बहराइच में कुल सात विधानसभा सीटें हैं—मटेरा, महसी, बलहा, नानपारा, पयागपुर, बहराइच और कैसरगंज। इन्हीं में से बहराइच सदर विधानसभा क्षेत्र चुनावी लिहाज से खास महत्व रखता है।
सदर सीट का चुनावी परिदृश्य
बहराइच सदर विधानसभा सीट, जिसका निर्वाचन क्षेत्र संख्या 286 है, शहरी और ग्रामीण इलाकों का मिला-जुला स्वरूप रखती है। यही वजह है कि यहां चुनावी मुद्दे भी कई स्तरों पर दिखाई देते हैं।
व्यापार, नगर विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार और स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाएं यहां के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। इसके साथ ही अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों के बीच मतों का रुझान भी चुनावी परिणामों को प्रभावित करता रहा है।
सदर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम, दलित और कुर्मी मतदाताओं को महत्वपूर्ण सामाजिक समूहों में गिना जाता है। इनके अलावा ब्राह्मण, वैश्य, यादव, ठाकुर और अन्य OBC समुदाय भी चुनावी समीकरण का अहम हिस्सा हैं।
शुरुआती इतिहास और परिसीमन
बहराइच सदर विधानसभा सीट का वर्तमान स्वरूप शुरुआत से ऐसा नहीं रहा है। 1952 से 1967 के बीच इस क्षेत्र का विधानसभा स्वरूप अलग-अलग रहा। 1952 के विधानसभा चुनाव में क्षेत्र को ‘बहराइच पूर्व’ और ‘बहराइच पश्चिम’ के रूप में विभाजित किया गया था। इसके बाद 1957 और 1962 के चुनावों में इसे ‘बहराइच उत्तर’ और ‘बहराइच दक्षिण’ के नाम से जाना गया। वर्ष 1967 के परिसीमन के बाद यह क्षेत्र एकीकृत होकर एकल ‘बहराइच’ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के रूप में सामने आया।
2022 में कांटे का मुकाबला
बहराइच सदर सीट पर पिछले विधानसभा चुनाव में मुकाबला बेहद करीबी रहा था। 2022 के चुनाव में भाजपा की अनुपमा जायसवाल ने 1,07,628 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी यासर शाह को 1,03,550 वोट मिले थे। दोनों प्रत्याशियों के बीच जीत का अंतर महज 4,078 वोट रहा। आंकड़े बताते हैं कि इस सीट पर मुकाबला कितना करीबी रहा और छोटे-से वोट स्विंग का भी परिणाम पर असर पड़ सकता है।
जातीय और सामाजिक समीकरण
बहराइच सदर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी समीकरण को समझने में सामाजिक संरचना की भूमिका अहम मानी जाती है। उपलब्ध पुराने विधानसभा-स्तरीय आकलनों में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 35 से 39 प्रतिशत तक बताई गई है। हालांकि, ऐसे जातीय आंकड़ों को आधिकारिक निर्वाचन आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि चुनाव आयोग विधानसभा स्तर पर जाति-वार मतदाता प्रतिशत प्रकाशित नहीं करता।
मुस्लिम मतदाताओं के अलावा दलित, ब्राह्मण, वैश्य, कुर्मी, यादव, निषाद और अन्य OBC समुदायों की भी चुनावी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। दलित समुदाय में पासी और जाटव, जबकि वैश्य समुदाय में गुप्ता और जायसवाल जैसे सामाजिक समूह स्थानीय चुनावी समीकरण में चर्चा में रहते हैं।
जिले के सामाजिक आंकड़े क्या बताते हैं?
बहराइच जिले की व्यापक सामाजिक तस्वीर को देखें तो पुराने जिला-स्तरीय अनुमानों में मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी करीब 31 प्रतिशत, दलित करीब 20 प्रतिशत, ब्राह्मण करीब 12 प्रतिशत, कुर्मी करीब 11 प्रतिशत, यादव करीब 8 प्रतिशत और ठाकुर करीब 7 प्रतिशत बताई गई थी। हालांकि, यह आंकड़े पूरे बहराइच जिले से जुड़े हैं और इन्हें बहराइच सदर विधानसभा क्षेत्र की जातीय संरचना का सटीक प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता।
सदर विधानसभा में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का मिश्रण होने के कारण विधानसभा की सामाजिक संरचना जिला औसत से अलग हो सकती है। इसलिए इन आंकड़ों को केवल बहराइच के व्यापक सामाजिक संदर्भ को समझने के लिए देखा जाना चाहिए।
महिला मतदाताओं की भूमिका भी अहम
चुनाव में महिला मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। बहराइच जिले की 2026 की अंतिम मतदाता सूची में 10,08,786 महिला मतदाता दर्ज हैं। हालांकि, विधानसभा संख्या 286 के लिए महिला मतदाताओं की अलग आधिकारिक संख्या का संक्षिप्त आंकड़ा उपलब्ध नहीं होने के कारण यहां कोई अलग अनुमान देना उचित नहीं होगा।
महिला मतदाताओं की प्राथमिकताएं केवल जातीय या सामाजिक पहचान से तय नहीं होतीं। स्वास्थ्य, शिक्षा, महंगाई, राशन, सुरक्षा, रोजगार, आवास और परिवार की आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दे भी उनके मतदान व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।
जनता से जुड़े प्रमुख मुद्दे
विकास और बुनियादी सुविधाएं: शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में सड़क, जल निकासी, और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार मुख्य मुद्दा है।
बेरोजगारी और पलायन: युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की कमी और शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग जनता के बीच प्रमुखता से उठती है।
कृषि और बाढ़ की समस्या: ग्रामीण और निचली बस्तियों से सटे इलाकों में बाढ़ की समस्या और किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य न मिलना बड़े चुनावी विषय हैं।
2027 में क्या होगी तस्वीर?
बहराइच सदर विधानसभा सीट पर 2022 में मुकाबला बेहद करीबी रहा था। ऐसे में 2027 के चुनाव में राजनीतिक दलों की रणनीति, उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय मुद्दे और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच मतदाताओं का रुझान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अब नजर इस बात पर है कि 2027 के चुनावी मैदान में कौन-कौन से मुद्दे प्रमुखता से उभरते हैं,
राजनीतिक दल जनता तक किस तरह पहुंच बनाते हैं और बहराइच सदर की जनता किन सवालों को अपने लिए सबसे अहम मानती है। ‘27 की सत्ता’ की इस कड़ी में हम बहराइच सदर विधानसभा की जमीन पर मौजूद चुनावी हलचल और जनता के मुद्दों को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
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