उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाला चुनाव इस बार सियासी तौर पर खासा दिलचस्प माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक बयान ने चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज कर दी हैं। सोमवार को अखिलेश यादव ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में उनकी पार्टी की ओर से सरप्राइज देखने को मिल सकता है। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इस संभावित रणनीति को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

10 सीटों पर बीजेपी-सपा के बीच सीधा मुकाबला

मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर देखा जाए तो इन 10 सीटों में बीजेपी के पास 8, समाजवादी पार्टी के पास 1 और बहुजन समाज पार्टी के पास 1 सीट है। हालांकि, इस बार के चुनाव में बसपा के पास अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं। ऐसे में मुख्य मुकाबला बीजेपी और सपा के बीच रहने की संभावना है।

दो के बजाय तीन उम्मीदवार उतार सकती है सपा

वर्तमान विधायक संख्या के हिसाब से बीजेपी गठबंधन के उम्मीदवारों को सात सीटों पर जीत दिलाने की स्थिति में माना जा रहा है, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटों पर अपने प्रत्याशी आसानी से जिता सकती है। इसके बाद भी सपा के पास करीब 25 से 26 अतिरिक्त वोट बचने का अनुमान है।

यही अतिरिक्त संख्या अखिलेश यादव की संभावित रणनीति का आधार बन सकती है। राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक सपा इस बार दो की जगह तीन उम्मीदवार उतारने पर विचार कर सकती है। पार्टी के भीतर इस विकल्प को लेकर विचार-विमर्श भी किया गया है। हालांकि, अंतिम तस्वीर नामांकन के दौरान ही साफ होगी।

तीसरे उम्मीदवार को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा?

सपा के तीन उम्मीदवार उतारने की संभावित रणनीति के पीछे एक अहम वजह चुनावी गणित को बताया जा रहा है। यदि समाजवादी पार्टी केवल दो प्रत्याशी मैदान में उतारती है, तो बीजेपी अपने अतिरिक्त संख्या बल के आधार पर नौवां उम्मीदवार भी उतार सकती है। ऐसी स्थिति में मुकाबला अधिक कड़ा हो सकता है और सपा के तीसरे उम्मीदवार के बजाय उसके किसी एक प्रत्याशी के सामने भी चुनौती खड़ी हो सकती है।

इसी वजह से सपा नेतृत्व उपलब्ध विधायकों के समर्थन को ध्यान में रखते हुए कोई अलग रणनीति अपना सकता है। अखिलेश यादव का ‘सरप्राइज’ वाला बयान इसी संभावित रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

नामांकन से खुलेगा पूरा पत्ता

सपा की रणनीति को लेकर तस्वीर ज्यादा देर तक साफ होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पार्टी की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र खरीदे जाने की तैयारी है। कौन-कौन लोग नामांकन पत्र लेते हैं, इससे सपा की वास्तविक योजना के बारे में काफी हद तक संकेत मिल सकता है।

यूपी विधानसभा में मौजूदा आंकड़ों के अनुसार बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास कुल 288 विधायक हैं। इनमें बीजेपी के 255, अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक शामिल हैं।

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अब अखिलेश के ‘सरप्राइज’ पर टिकी नजरें

वहीं, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पास कुल 103 विधायक हैं। इनमें सपा के 101 और कांग्रेस के 2 विधायक हैं। इसके अलावा जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के 2 और 3 निर्दलीय विधायक भी सदन में हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि अखिलेश यादव राज्यसभा चुनाव में वास्तव में कौन-सी रणनीति अपनाते हैं और क्या सपा तीसरा उम्मीदवार उतारकर चुनावी मुकाबले को नया मोड़ देती है।