टेक
नासा ने चंद्रमा पर भेजे 5 सुपर तीखे हॉट सॉस, क्यों स्पेस में खाना हमेशा बेस्वाद लगता है?
नासा ने आर्टेमिस 2 मिशन में चंद्रमा जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के साथ 5 हॉट सॉस भेजे हैं। स्पेस में माइक्रोग्रेविटी के कारण नाक बंद हो जाती है और खाना बेस्वाद लगता है, लेकिन हॉट सॉस का कैप्साइसिन बिना नाक के भी तीखापन महसूस कराता है, जिससे एस्ट्रोनॉट्स को स्वाद का आनंद मिल सके।
नासा ने 2 अप्रैल 2026 को आर्टेमिस 2 मिशन लॉन्च किया, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री 10 दिनों में चंद्रमा का चक्कर लगाकर वापस लौटेंगे। आपको बता दें कि इस मिशन में कुल 189 तरह के खाने के सामान शामिल हैं, जिनमें 58 टॉर्टिला, 43 कप कॉफी और सबसे खास बात यह है कि 5 अलग-अलग हॉट सॉस शामिल हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इतने महंगे और गंभीर मिशन में हॉट सॉस क्यों भेजी गई? लेकिन यह सिर्फ स्वाद या मज़ाक के लिए नहीं है। वास्तव में, यह नासा की एक गंभीर समस्या का अस्थायी समाधान है, जिसे पिछले 60 वर्षों से पूरी तरह हल नहीं किया जा सका है।
माइक्रोग्रैविटी का शरीर पर असर
पृथ्वी छोड़ते ही शरीर तुरंत यह महसूस नहीं करता कि वह अब गुरुत्वाकर्षण रहित वातावरण में है। लॉन्च के 6 से 10 घंटे के भीतर शरीर के तरल पदार्थ जैसे खून, लिम्फ और कोशिकाओं के बीच का पानी, ऊपर की ओर बढ़ने लगते हैं। पृथ्वी पर ग्रैविटी इन्हें नीचे खींचती है, लेकिन अंतरिक्ष में यह बल गायब हो जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि चेहरे में सूजन आ जाती है, साइनस में तरल भर जाता है और नाक बंद हो जाती है। इसे ‘स्पेस कोल्ड’ कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 75% अंतरिक्ष यात्री इस स्थिति का अनुभव करते हैं। यह किसी वायरस की वजह से नहीं होता, बल्कि गुरुत्वाकर्षण की कमी का प्रत्यक्ष असर है। आर्टेमिस 2 के क्रू मेंबर्स को भी लॉन्च के कुछ घंटों बाद यही समस्या महसूस हुई, और यह तब तक बनी रहेगी जब तक वे वापस पृथ्वी पर नहीं लौटते।
)
अंतरिक्ष में स्वाद क्यों फीका पड़ता है
जीभ सिर्फ पांच स्वाद पहचानती है, लेकिन असली स्वाद 80% नाक के जरिए आता है। माइक्रोग्रैविटी में नाक बंद हो जाने के कारण सुगंध नहीं पहुंच पाती, जिससे खाना बेस्वाद लगने लगता है। आर्टेमिस 2 के सदस्यों को भी यही समस्या होगी।

स्पेस फूड और उसके सीमित स्वाद
अंतरिक्ष में ताजा खाना लंबे समय तक नहीं रखा जा सकता। आर्टेमिस 2 मिशन में पहले 1-2 दिन के अलावा बाकी भोजन ड्राई, रीहाइड्रेटेबल, हाई-हीट प्रोसेस्ड या रेडिएशन-सुरक्षित तरीके से तैयार किया गया है। इन प्रक्रियाओं में खाने के सुगंधित तत्व पहले ही कम हो जाते हैं, और महीनों तक स्टोर करने पर स्वाद और भी घट जाता है। ऊपर से माइक्रोग्रैविटी की वजह से नाक बंद हो जाती है और कैप्सूल की मशीनों, रिसाइकल्ड हवा और अन्य गंधें भी स्वाद को प्रभावित करती हैं। परिणामस्वरूप, खाना केवल कैलोरी देता है, मज़ा नहीं।
स्वाद का कम होना खाने को सिर्फ एक ज़रूरी काम बना देता है, जिससे अंतरिक्ष यात्री धीरे-धीरे कम खाने लगते हैं। अध्ययन दिखाते हैं कि उनकी ऊर्जा खपत जरूरत से लगभग 25% कम हो जाती है, जिससे मांसपेशियां कमजोर होती हैं, इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है और दिमाग की क्षमता घट जाती है। नासा इसे ‘रेड रिस्क’ मानता है, यानी अभी इसका कोई पूरी तरह समाधान नहीं है।
Written By - Namita Verma
आपके दिए हुए प्रोफाइल को **राजीव सिंह** और **TNP News** के अनुसार ढालकर, NBT/Times of India से जुड़े संदर्भ हटाकर इस तरह किया जा सकता है: ## राजीव सिंह, TNP News में एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। राजीव सिंह TNP News में एक्सप्लेनर, स्पेशल स्टोरीज और रिसर्च आधारित खबरों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और एंटरटेनमेंट समेत विभिन्न कैटेगरी की खबरों से जुड़े होते हैं। किसी भी विषय पर स्टोरी तैयार करते समय शरद दीक्षित रिसर्च, डीप डाइव, फैक्ट चेक, वैल्यू एड और विशेषज्ञों की राय को विशेष महत्व देते हैं। TNP News के लिए वे महत्वपूर्ण और चर्चित मुद्दों पर विश्लेषणात्मक एवं रियल टाइम स्टोरीज तैयार करते हैं। उनका फोकस किसी भी खबर को केवल प्रस्तुत करने के बजाय उसके पीछे की पूरी कहानी, तथ्यों और उसके संभावित प्रभाव को पाठकों तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर रहता है। राजीव सिंह को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, राजनीति, बिजनेस, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन की खबरों पर लगातार नजर रखने का अनुभव है। किसी भी खबर पर उनकी पहली प्राथमिकता तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी होती है। इसके बाद वे यह समझने पर जोर देते हैं कि उस खबर का समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। ### पत्रकारिता का अनुभव राजीव सिंह ने पत्रकारिता के क्षेत्र में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग, इंटरव्यू, रिसर्च, डिजिटल कंटेंट और स्पेशल स्टोरीज जैसी विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। अपने पत्रकारिता करियर के दौरान उन्होंने समाचारों के पारंपरिक माध्यमों के साथ-साथ डिजिटल पत्रकारिता की बदलती जरूरतों और नई तकनीकों को भी करीब से समझा है। उन्होंने राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों को कवर करने के साथ-साथ राजनीतिक घटनाक्रम, चुनाव, सामाजिक विषयों, प्रशासनिक मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया है। TNP News में राजीव सिंह का प्रमुख फोकस रिसर्च आधारित पत्रकारिता, एक्सप्लेनर स्टोरी, डीप डाइव, स्पेशल स्टोरी और तथ्यपरक विश्लेषण पर है। उनका प्रयास रहता है कि जटिल और महत्वपूर्ण विषयों को आसान भाषा में इस तरह प्रस्तुत किया जाए कि पाठक खबर के साथ-साथ उसके कारण, प्रभाव और पूरे संदर्भ को भी समझ सके। ### पत्रकारिता का दृष्टिकोण राजीव सिंह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, राजनीति, बिजनेस, सामाजिक मुद्दों और डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड पर उनकी लगातार नजर रहती है। वे खबर के तत्काल प्रभाव के साथ-साथ उसके दीर्घकालिक प्रभाव को भी समझने और पाठकों के सामने रखने पर जोर देते हैं। उनकी पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि पाठकों को **खबर के पीछे की कहानी, तथ्य और उसका असर** समझाना है। ### TNP News में भूमिका TNP News में राजीव सिंह एक्सप्लेनर, स्पेशल स्टोरीज, डीप डाइव और रिसर्च आधारित कंटेंट के साथ काम कर रहे हैं। वे महत्वपूर्ण घटनाओं और ट्रेंडिंग मुद्दों पर रियल टाइम एक्सप्लेनर और विश्लेषणात्मक स्टोरी तैयार करने के साथ डिजिटल ऑडियंस की जरूरतों के अनुसार कंटेंट को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने पर ध्यान देते हैं। TNP News के माध्यम से उनका प्रयास ऐसी पत्रकारिता को आगे बढ़ाना है जिसमें **तथ्य, रिसर्च, निष्पक्ष विश्लेषण और जनसरोकार** को प्राथमिकता मिले।