आजकल Instagram पर रील देखते समय कई तरह के शॉपिंग ऑफर्स नजर आते हैं। कहीं महंगे कपड़ों पर भारी छूट मिल रही होती है, तो कहीं हजारों रुपये का सामान बेहद कम कीमत में बेचने का दावा किया जाता है। ऐसे ऑफर्स देखकर कोई भी खरीदारी करने के लिए उत्साहित हो सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर ऑफर असली हो।

फेस्टिव सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ जाता है। इस दौरान कई कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए खास सेल और डिस्काउंट देती हैं। इसी का फायदा उठाकर साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। वे नामी कंपनियों के नाम पर फर्जी विज्ञापन और वेबसाइट बनाते हैं, ताकि लोग उन पर भरोसा करके अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठें। इसलिए ऑनलाइन खरीदारी करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

90 से 99 प्रतिशत तक की छूट का लालच

साइबर ठग लोगों को फंसाने के लिए ऐसे ऑफर्स दिखाते हैं, जिन पर पहली नजर में भरोसा करना आसान होता है। इन विज्ञापनों में बड़े शॉपिंग ब्रांड्स के नाम और भारी डिस्काउंट का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार किसी महंगे प्रोडक्ट पर 90 से 99 प्रतिशत तक की छूट देने का दावा किया जाता है।

इतनी ज्यादा छूट देखकर लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे खरीदारी करने का मन बना लेते हैं। ठग भी इसी जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। इसलिए किसी भी ऑफर को देखकर तुरंत पेमेंट करने के बजाय पहले उसकी सच्चाई जानना जरूरी है।

सस्ता सामान देखकर तुरंत ऑर्डर न करें

कई फर्जी विज्ञापनों में महंगे मोबाइल फोन, ब्रांडेड कपड़े और घरेलू सामान बेहद कम कीमत पर देने की बात कही जाती है। लोगों को लगता है कि इतना अच्छा मौका बार-बार नहीं मिलेगा, इसलिए वे जल्दी से ऑर्डर कर देते हैं, लेकिन कई बार यह ऑफर सिर्फ लोगों को फंसाने का तरीका होता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए जिस कंपनी का सामान खरीदना चाहते हैं, उसकी आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जाकर कीमत और डिस्काउंट की जानकारी जरूर चेक करें, साथ ही किसी अनजान लिंक पर क्लिक करके अपनी बैंकिंग डिटेल्स या दूसरी निजी जानकारी साझा न करें।

फर्जी वेबसाइट को ऐसे पहचाने

साइबर ठग कई बार ऐसी वेबसाइट तैयार करते हैं, जो देखने में बिल्कुल असली शॉपिंग प्लेटफॉर्म जैसी लगती हैं। वे कंपनी का लोगो, प्रोडक्ट की तस्वीरें और सेल से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल करके लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। इसलिए खरीदारी करने से पहले वेबसाइट के URL और डोमेन नेम को ध्यान से देखें। केवल लोगो या वेबसाइट के डिजाइन को देखकर उस पर भरोसा न करें। किसी सोशल मीडिया विज्ञापन से वेबसाइट खोलने के बजाय संबंधित ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट खुद सर्च करके खोलना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।

1200 रुपये में iPhone मिलने का दावा कितना सही?

अगर Instagram या किसी दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपको 1200 रुपये में iPhone या कोई दूसरा महंगा स्मार्टफोन मिलने का दावा दिखाई देता है, तो सावधान हो जाएं। इतनी कम कीमत पर महंगा फोन देने वाला ऑफर संदेह पैदा करता है।

ऐसे में बिना जांच किए पैसे न भेजें। पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑफर की पुष्टि करें। अगर वहां इस तरह की कोई डील नहीं मिलती, तो सोशल मीडिया पर दिख रहे विज्ञापन पर भरोसा करने से बचें। याद रखें, सिर्फ किसी ब्रांड का नाम या लोगो देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि ऑफर असली है।

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ऑनलाइन ठगी हो जाए तो क्या करें?

अगर आपने किसी फर्जी ऑफर के चक्कर में पैसे गंवा दिए हैं, तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें।

बैंक को सूचना दें: अपने बैंक से संपर्क करके ट्रांजैक्शन की जानकारी दें और खाते को सुरक्षित करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
1930 पर कॉल करें: साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए भारत की राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर जल्द से जल्द संपर्क करें।
ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें: आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
सबूत सुरक्षित रखें: जिस वेबसाइट से खरीदारी की थी, उसका URL, पेमेंट का स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन आईडी और ठग से हुई बातचीत जैसी जानकारी संभालकर रखें।

ध्यान रखें कि ठगी के बाद जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, पैसे रोकने या वापस पाने की संभावना के लिए उतना ही बेहतर हो सकता है। हालांकि, पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। फेस्टिव सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग करते समय सावधानी बरतना सबसे जरूरी है। कोई भी ऑफर कितना ही आकर्षक क्यों न लगे, पैसे देने से पहले उसकी जांच जरूर करें। थोड़ी सी सतर्कता आपको साइबर ठगी से बचाने में मदद कर सकती है।