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बकरीद पर क्यों बढ़ जाती है खस्सी बकरों की मांग? जानिए इसकी खासियत
Bakrid 2026: इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने ज़ुल हिज्जा में मनाया जाने वाला ईद-उल-अजहा काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय में कुर्बानी की परंपरा निभाई जाती है,जिसके लिए बाजारों में बकरों की खरीदारी तेज़ हो जाती है।
Bakrid 2026: इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने ज़ुल हिज्जा में मनाया जाने वाला ईद-उल-अजहा काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय में कुर्बानी की परंपरा निभाई जाती है,जिसके लिए बाजारों में बकरों की खरीदारी तेज़ हो जाती है। हर साल की तरह इस बार भी मंडियों और पशु बाजारों में रौनक बढ़ गई है। खास बात यह है कि सामान्य बकरों की तुलना में खस्सी बकरों की मांग सबसे अधिक देखी जाती है। आखिर ये खस्सी बकरे क्या होते हैं और लोग इन्हें इतना पसंद क्यों करते हैं, आइए समझते हैं।
खस्सी बकरा की खासियत
दरअसल, खस्सी बकरा कोई अलग नस्ल नहीं होता, बल्कि यह एक विशेष प्रक्रिया से तैयार किया गया नर बकरा होता है। जब बकरा छोटा होता है, तब उसका बंध्याकरण (Castration) कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद उसके शरीर में प्रजनन से जुड़े हार्मोन, खासकर टेस्टोस्टेरोन का निर्माण कम हो जाता है। इसका असर उसके शरीर, स्वभाव और मांस की गुणवत्ता पर साफ दिखाई देता है।
खस्सी बकरे की मीट प्रीमियम क्वालिटी का माना जाता है
खस्सी बकरों की सबसे बड़ी खासियत उनका मांस माना जाता है। सामान्य बकरों के मांस में कई बार तेज गंध या ‘गेमी स्मेल’ महसूस होती है, जबकि खस्सी बकरे का मटन मुलायम, रसीला और कम गंध वाला होता है। यही कारण है कि मटन पसंद करने वाले लोग इसे प्रीमियम क्वालिटी का मानते हैं। यह जल्दी पकता है और स्वाद में भी बेहतर माना जाता है।
खस्सी बकरों की कीमत
इसके अलावा, बंध्याकरण के बाद बकरे की ऊर्जा प्रजनन के बजाय शरीर के विकास में लगती है। इससे उसकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं और वजन तेजी से बढ़ता है। ऐसे बकरों में चर्बी और हड्डियां अपेक्षाकृत कम होती हैं, जबकि शुद्ध मांस अधिक मात्रा में मिलता है। खरीदारों को अपनी कीमत के बदले ज्यादा अच्छा मांस मिलने की वजह से भी खस्सी बकरों की मांग बढ़ जाती है।
स्वभाव में काफी शांत होते है खस्सी बकरी
इन बकरों का स्वभाव भी सामान्य बकरों की तुलना में काफी शांत होता है। जहां सामान्य नर बकरे आक्रामक और लड़ाकू हो सकते हैं, वहीं खस्सी बकरे आसानी से झुंड में रहते हैं। इससे पशुपालकों को उनकी देखभाल, परिवहन और बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होती है।
आकर्षक शरीर के वजह से ऊंची कीमत
बकरीद के दौरान इनकी कीमत नस्ल, वजन और सेहत के आधार पर तय होती है। सिरोही, गुजरी और तोतापरी जैसी नस्लों के खस्सी बकरे बाजार में अधिक दाम पर बिकते हैं। बेहतर मांस, शांत स्वभाव और आकर्षक शरीर के कारण लोग इन्हें खुशी-खुशी ऊंची कीमत देकर खरीदते हैं।
Written By: Geeta Sharma
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