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दिल्ली अग्निकांड के जिम्मेदार कौन? जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष ने मांगी जवाबदेही, पीड़ितों के प्रति व्यक्त की संवेदना
News Delhi: दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में हाल ही में लगी भीषण आग में हुई जनहानि को लेकर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
News Delhi: दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में हाल ही में लगी भीषण आग में हुई जनहानि को लेकर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने गहरा शोक व्यक्त किया है। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 21 लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आई है,जिनमें कुछ विदेशी नागरिकों के शामिल होने की भी जानकारी दी गई है। घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है और एक बार फिर शहरी भवनों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रो. सलीम इंजीनियर ने घायलों के प्रति व्यक्त की संवेदना
मीडिया से बातचीत के दौरान अपने बयान में प्रो. सलीम इंजीनियर ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा कि यह दुर्घटना केवल एक आकस्मिक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों के पालन और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में हुई गंभीर चूक का परिणाम है। उनके अनुसार, कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और होटलों में बुनियादी अग्नि सुरक्षा उपायों की कमी देखने को मिलती है, जो ऐसी घटनाओं को और अधिक भयावह बना देती है।
'घटना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है'
उन्होंने यह भी बताया की शुरुआती जानकारी के अनुसार होटल में निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को ठहराया गया था,जो सुरक्षा नियमों के खिलाफ है। ऐसे हालात में आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है और जान-माल का नुकसान बढ़ जाता है। उनका कहना था कि यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी तंत्र की कमजोरी को भी उजागर करती है।
'आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में ऐसी घटना का ज्यादा खतरा'
साथ ही उन्होंने आगे कहा कि आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में इस प्रकार की चूकें और भी अधिक खतरनाक साबित होती हैं। क्योंकि यहां बड़ी संख्या में छात्र,पेशेवर और यात्री अस्थायी रूप से होटलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों में ठहरते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन न केवल कानूनी आवश्यकता है,बल्कि मानव जीवन की रक्षा के लिए अनिवार्य जिम्मेदारी भी है।
'घटनाओं को रोकने के लिए होने चाहिए ठोस उपाए'
उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्य निश्चित रूप से सराहनीय हैं,लेकिन केवल प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक और ठोस निवारक उपाय अपनाए जाएं। इसके लिए सभी समान प्रकार के प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नियमों का सख्ती से पालन हो।
कठोर जवाबदेही तय की जानी चाहिए: प्रो. सलीम इंजीनियर
उन्होंने आगे सुझाव दिया कि उल्लंघन के मामलों में स्पष्ट और कठोर जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि लापरवाही दोबारा न हो। साथ ही शहरी विकास की प्रक्रिया में सार्वजनिक सुरक्षा,पारदर्शिता और जिम्मेदार प्रशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
'प्रशासन को दुखद घटनाओं से लेनी चाहिए सबक'
अंत में उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस प्रकार की दुखद घटनाओं से सबक लेते हुए सुधार आवश्यक हैं,ताकि भविष्य में मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
(रिपोर्ट: एम.अतहर उद्दीन मुन्ने भारती) Edited By: Geeta Sharma
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