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राम मंदिर चढ़ावा गिनती मामला: ड्यूटी चार्ट से सामने आए नए दावे, जांच के बीच कई सवाल
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए दावे और जानकारियां सामने आ रही हैं। हाल ही में एक कथित ड्यूटी चार्ट और कैश काउंटिंग व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सामने आई है।
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए दावे और जानकारियां सामने आ रही हैं। हाल ही में एक कथित ड्यूटी चार्ट और कैश काउंटिंग व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सामने आई है। जिसमें मार्च 2025 में नियुक्त किए गए कर्मचारियों और उनकी जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया है। इन दावों ने मंदिर परिसर में नकदी गिनती की प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मार्च 2025 में हुई थी 10 कर्मचारियों की नियुक्ति
सामने आई जानकारी के अनुसार, मार्च 2025 में ट्रस्ट ने कैश काउंटिंग के लिए 10 नए कर्मचारियों को नियुक्त किया था। दावा किया गया है कि इन कर्मचारियों को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के निर्देश पर अनिल मिश्रा के माध्यम से चयनित किया गया। बताया गया कि 2 मार्च को उम्मीदवारों को बुलाया गया, 4 मार्च को उनका इंटरव्यू हुआ और 6 मार्च 2025 से सभी ने काम संभाल लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती दिनों में इन कर्मचारियों के पास पहचान पत्र भी नहीं थे। उन्हें केवल ड्यूटी शीट के आधार पर मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाती थी। सभी कर्मचारियों को ट्रस्ट की ओर से 18 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था तथा उनकी ड्यूटी सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित थी।
दो स्थानों पर होती थी कैश काउंटिंग
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और चढ़ावे में वृद्धि को देखते हुए नकदी गिनने के लिए दो अलग-अलग केंद्र बनाए गए थे। पहला केंद्र मंदिर परिसर स्थित पिलग्रिम फैसिलिटेशन सेंटर (PFC) भवन में और दूसरा परिसर के भीतर स्थित पुलिस चौकी में संचालित किया जाता था। रिपोर्ट के अनुसार, नए कर्मचारियों की तैनाती मुख्य रूप से पुलिस चौकी स्थित काउंटिंग रूम में की गई थी। यहां नोटों की छंटाई, गड्डियां तैयार करना और मशीनों से नकदी की गिनती की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। समय के साथ कुछ कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने के बाद उनकी जगह नए लोगों को भी नियुक्त किया गया।
निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
जानकारी में यह भी दावा किया गया है कि कैश काउंटिंग प्रक्रिया की निगरानी पर्याप्त रूप से नहीं हो रही थी। मॉनिटरिंग रूम में कर्मचारियों की ड्यूटी होने के बावजूद लगातार निगरानी नहीं रखी जाती थी। आरोप है कि काउंटिंग रूम में लगे कैमरों और मॉनिटर के बावजूद पूरी प्रक्रिया पर प्रभावी नियंत्रण नहीं था, जिससे अनियमितताओं की संभावना बनी रहती थी। बताया गया कि नकदी से भरे बक्सों को काउंटिंग रूम तक पहुंचाने और बाद में बैंक को सौंपने की जिम्मेदारी एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी एवं काउंटिंग इंचार्ज के पास थी। वहीं, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि आभूषणों के रिकॉर्ड को लेकर भी व्यवस्थित लेखा-जोखा नहीं रखा जाता था।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई तत्काल कार्रवाई
रिपोर्ट के अनुसार, कथित चोरी का पहला संकेत फरवरी में मिला था, जब काउंटिंग टीम के एक सदस्य ने इंचार्ज को नकदी चोरी की आशंका से अवगत कराया। दावा है कि इस शिकायत पर तत्काल सख्त कार्रवाई करने के बजाय इंचार्ज ने कथित तौर पर कहा, प्रभु देख ही रहे हैं, कौन सा हमारे-आपके घर से जा रहा है। हालांकि, इन सभी दावों की आधिकारिक जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सामने आए आरोपों और दावों में कितनी सच्चाई है तथा यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
Written By: Geeta Sharma
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