Punjab News: पंजाब सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा ED की तरफ से पंजाब पुलिस के DGP को भेजे गए पत्रों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। पंजाब सरकार ने इस मामले की जांच CBI को सौंपने की अपील की है। कोर्ट ने CBI को मामले में आपराधिक केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने और 2 महीने में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश अधिवक्ता निखिल सराफ की तरफ से दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनाया गया।
क्या है मामला
ईडी ने पंजाब के डीजीपी को 3 पत्र लिखकर सीएम भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन और कुछ अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार में संलिप्तता का आरोप लगाया था। ईडी ने इस मामले में FIR दर्ज करने की मांग भी की थी। पंजाब पुलिस द्वारा केस दर्ज करने में विफल रहने के बाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। यह निर्देश अधिवक्ता निखिल थम्मन द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। जिसमें उन्होंने कहा था कि पंजाब में 4 साल से ज्यादा समय से कोई नियमित डीजीपी नहीं है। याचिका में प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और नियमित डीजीपी की नियुक्ति संबंधी निर्देशों का हवाला दिया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा अनुशंसित पैनल से डीजीपी की नियुक्ति का प्रावधान है।
भ्रष्टाचार का आरोप
पंजाब कांग्रेस प्रमुख परगत सिंह ने राज्य प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को सरकार के साथ गठबंधन न करने की चेतावनी दी। यह सब पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस निर्देश के बाद हुआ, जिसमें ईडी द्वारा पंजाब पुलिस के डीजीपी को लिखे पत्रों से जुड़े मामले को सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने इसे और पार्टी सदस्यों को "ढोंग" करार दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का कार्यालय भी जांच के दायरे में है।
कानून को सख्त बनाना मकसद
आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए पंजाब कांग्रेस प्रमुख परगत सिंह ने कहा कि इस पार्टी को भाजपा ने अपनी बी-टीम के तौर पर बनाया था, लेकिन इसका मकसद कानूनों को इतना सख्त बनाना था कि चाहे मंत्री हो या वरिष्ठ अधिकारी, भ्रष्टाचार में लिप्त कोई भी व्यक्ति अपने आप जेल में पहुंच जाए आज वही स्थिति है। अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगियों से जुड़ा पूरा मामला एक दिखावा है। CM कार्यालय भी भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने पहले भी उठाया था।
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