तेलंगाना के सिकंदराबाद स्थित परेड ग्राउंड के पास भारतीय वायुसेना (IAF) का अधिकारी होने का दावा कर रहे एक शख्स को पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान नितेश कुमार पाल के रूप में हुई है। वह मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और फिलहाल हैदराबाद में डिलीवरी एजेंट के तौर पर काम करता है। बेगमपेट पुलिस के अनुसार, नितेश कुमार पाल को 7 अक्टूबर (बुधवार) को दोपहर करीब 1:45 बजे परेड ग्राउंड के पास पकड़ा गया। आरोपी खुद को भारतीय वायुसेना का अधिकारी बता रहा था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि वह किस मकसद से खुद को वायुसेना अधिकारी बता रहा था।
अगस्त में जज बनकर ठगी की कोशिश का मामला आया था सामने
इससे पहले अगस्त में दिल्ली में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां एक साइबर अपराधी ने खुद को तीस हजारी कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के तौर पर पेश किया था। आरोपी ने जज की फोटो का इस्तेमाल कर दिल्ली बार एसोसिएशन के सदस्यों से व्हाट्सऐप के जरिए पैसे मांगे थे। आरोपी कथित तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय नंबर का इस्तेमाल कर रहा था। दिलचस्प बात यह थी कि जिस समय वह थाईलैंड में होने का दावा करते हुए पैसों की मांग कर रहा था, उस समय संबंधित जज तीस हजारी कोर्ट में ही सुनवाई कर रहे थे।
आरोपी ने खुद को बताया जज
दिल्ली बार एसोसिएशन के सीनियर मेंबर एग्जीक्यूटिव अधिवक्ता गगनप्रीत सिंह ने 24 अगस्त को संदेश मिलने के बाद पुलिस से शिकायत की थी, उन्होंने व्हाट्सऐप नंबर पर वापस कॉल कर आरोपी से अपनी पहचान की पुष्टि करने को कहा। इसके बाद आरोपी ने दावा किया कि वह वही जज है और थाईलैंड में किसी परेशानी में फंस गया है, जिसके चलते उसे पैसों की जरूरत है, उसने यह भी कहा कि वह अपने वैकल्पिक नंबर से संपर्क कर रहा है। इसके बाद अधिवक्ता सिंह ने संबंधित जज से संपर्क कर उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी। जज को भी पता चला कि उनके नाम और आधिकारिक फोटो का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें- हेमंत सोरेन की मां रुपी सोरेन का निधन, पीएम मोदी ने जताया दुख
सब्जी मंडी थाने में BNS की धाराओं के तहत FIR दर्ज
सब्जी मंडी पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के मुताबिक, आरोपी ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश का नाम और उनकी आधिकारिक तस्वीर अपनी प्रोफाइल पर लगाई थी। इसके बाद वह बार एसोसिएशन के सदस्यों को मैसेज भेजकर आपातकालीन आर्थिक मदद और पैसे ट्रांसफर करने की मांग कर रहा था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को चैट के स्क्रीनशॉट, फर्जी प्रोफाइल और अन्य डिजिटल सबूत भी सौंपे थे। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319(2) और 62 के तहत FIR दर्ज की गई थी।