चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में अब करीब चार महीने का समय बचा है। ऐसे में राज्य की सियासत में शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इस बीच शिरोमणि अकाली दल की एकमात्र सांसद हरसिमरत कौर बादल ने साफ किया है कि उन्होंने अकाली दल और बीजेपी के संभावित गठबंधन को लेकर कोई संकेत नहीं दिया है।

चार बार की बठिंडा सांसद हरसिमरत कौर बादल इन दिनों पूरे पंजाब में नशे के खिलाफ ‘मां धीयां इंसाफ यात्रा’ निकाल रही हैं। इस दौरान वह रोजाना कई बैठकों में हिस्सा ले रही हैं और महिलाओं को नशे के खिलाफ अभियान से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।

हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब में नशे की समस्या, अकाली दल के भविष्य, उनके राज्य की राजनीति में उतरने की अटकलों और अकाली दल-बीजेपी गठबंधन की चर्चाओं पर अपनी बात रखी।

नशे के खिलाफ अभियान पर क्या बोलीं हरसिमरत?

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि उनका अभियान किसी राजनीतिक दल से मुकाबला करने के लिए नहीं है। उनका उद्देश्य उन महिलाओं का दर्द समझना है जो पंजाब में नशे की समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाएं उनसे कहती हैं कि उन्हें अपने बच्चों को स्कूल और कॉलेज भेजने में डर लगता है।

आम आदमी पार्टी सरकार की ‘मां धीयां सत्कार योजना’ पर निशाना साधते हुए हरसिमरत ने इसे महज प्रतीकात्मक योजना बताया। उन्होंने कहा कि पांच साल में 60 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने वाली योजना चुनाव से सिर्फ छह महीने पहले शुरू की गई।

हरसिमरत के मुताबिक, नशे से प्रभावित महिलाएं उनके कार्यक्रमों में स्वेच्छा से शामिल हो रही हैं।

भगवंत मान के आरोपों पर हरसिमरत का पलटवार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार पिछली अकाली दल-बीजेपी सरकार के 2007 से 2017 के कार्यकाल को राज्य में नशे की समस्या के लिए जिम्मेदार बताते रहे हैं।

इस पर हरसिमरत ने कहा कि जब अकाली दल-बीजेपी सत्ता में था, तब पंजाब की सड़कों पर खुलेआम नशे की बिक्री नहीं होती थी और युवाओं को हाथ में नशे की सुई लगाए हुए नहीं देखा जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि आज पंजाब में चिट्टा यानी हेरोइन टॉफियों की तरह बिक रहा है।

हरसिमरत ने दावा किया कि नशे के मामलों में शिकायत करने वालों को धमकाया और परेशान किया जा रहा है, जबकि नशा बेचने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर भी हेरोइन बेचने के आरोप लगने की बात कही और नशा तस्करों तथा पुलिस के बीच गठजोड़ का आरोप लगाया।

उन्होंने सवाल किया कि जो सरकार 10 साल पहले सत्ता में थी, उसे आज की समस्याओं के लिए कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

‘नन्ही छांव’ संस्था को लेकर भी बोलीं हरसिमरत

मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से उनकी सामाजिक संस्था ‘नन्ही छांव’ पर की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर हरसिमरत ने कहा कि यह संस्था उनके दिल के बेहद करीब है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने कई दशक पहले इस संस्था की शुरुआत की थी, उस समय वह सक्रिय राजनीति में भी नहीं थीं। उनके मुताबिक, संस्था के माध्यम से अब तक 14 हजार से ज्यादा महिलाओं को सशक्त किया गया है।

भगवंत मान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने बठिंडा में एम्स जैसी परियोजना लाई, जबकि मुख्यमंत्री के कार्यकाल में पंजाब के लिए कोई बड़ी परियोजना नहीं आई।

‘मां धीयां दी फौज’ अभियान क्या है?

हरसिमरत कौर बादल ने अब ‘मां धीयां दी फौज’ नाम से एक नया अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य पंजाब में नशा तस्करों और उनके कथित संरक्षकों की पहचान करना है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के जरिए महिलाओं को बदलाव की मुख्य कड़ी बनाया जाएगा।

इसके लिए एक प्रपत्र जारी किया गया है, जिसे गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। महिलाओं से अपील की गई है कि वे अपने आसपास होने वाली नशे की तस्करी की घटनाओं की जानकारी दें और तस्करों, नशा बेचने वालों तथा उन्हें संरक्षण देने वालों के नाम भी दर्ज करें।

हरसिमरत के मुताबिक, इन प्रपत्रों को एक विशेष नशा विरोधी कार्यबल के पास भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर अकाली दल की सरकार सत्ता में आती है तो इस कार्यबल का नेतृत्व महिला पुलिस महानिदेशक करेंगी और आरोपियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जाएगी।

क्या हरसिमरत कौर बादल पंजाब की राजनीति में उतरेंगी?

पंजाब में हरसिमरत कौर बादल की राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने के बाद यह चर्चा तेज है कि वह राज्य की सक्रिय राजनीति में उतर सकती हैं और अकाली दल की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाई जा सकती हैं।

हालांकि, हरसिमरत ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि ये उनके राजनीतिक विरोधियों की ओर से फैलाई जा रही अफवाहें हैं।

उन्होंने कहा कि वह हमेशा पंजाब में सक्रिय रही हैं क्योंकि अकाली दल एक क्षेत्रीय पार्टी है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पंजाब और पंजाबियों का दर्द समझती है और पंजाब उनका अपना राज्य है।

हरसिमरत के मुताबिक, वह अब तक अपनी यात्रा के दौरान 14 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर चुकी हैं और आने वाले हफ्तों में कई और क्षेत्रों में जाएंगी।

अकाली दल-बीजेपी गठबंधन पर क्या बोलीं हरसिमरत?

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अकाली दल और बीजेपी के संभावित गठबंधन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इस पर हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि उन्होंने इस तरह के किसी गठबंधन का कोई संकेत नहीं दिया है।

उन्होंने बताया कि अगस्त में लोंगोवाल के पार्टी क्षेत्र प्रभारी ने जब इलाके में किसी शिक्षण संस्थान को लेकर उनसे सवाल किया था, तब उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि अगर अकाली दल सत्ता में आता है तो क्षेत्र का विकास होगा। हरसिमरत ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से समझा गया।

उन्होंने बताया कि वह पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की उस क्षमता का जिक्र कर रही थीं, जिसके जरिए वह केंद्र में किसी भी दल की सरकार होने के बावजूद अपने राजनीतिक संबंधों और प्रभाव के माध्यम से पंजाब के लिए परियोजनाएं लाने में सफल रहते थे।

2027 चुनाव में अकाली दल की संभावनाओं पर क्या कहा?

2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में अकाली दल की संभावनाओं पर हरसिमरत ने कहा कि 2017 में कांग्रेस ने लगातार 10 साल सत्ता से बाहर रहने के बाद वापसी की थी। उन्होंने भरोसा जताया कि इस बार भी जनता के समर्थन से अकाली दल सत्ता में लौट सकता है।

हरसिमरत ने कहा कि पंजाब के लोग अब नहीं चाहते कि दिल्ली से उनका शासन चलाया जाए। उन्होंने अकाली दल को पंजाबियों की पार्टी बताते हुए कहा कि यह पार्टी पंजाब और पंजाबियों के लिए है।

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा, महिलाओं की सुरक्षा, विकास और संभावित राजनीतिक गठबंधन आने वाले समय में चुनावी राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।