Dwarka court: दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने हत्या की कोशिश से जुड़े मामले में गैंगस्टर काला जठेड़ी को बरी कर दिया है। ट्रायल के दौरान पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर कोर्ट ने सबूतों का हवाला देकर काला जठेड़ी को बरी कर दिया है। लेकिन कोर्ट ने चार अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। इसमें हत्या की कोशिश, पुलिस पर हत्या और आर्म्स एक्ट के मद्देनजर सभी आरोप तय किए है।
4 अन्य दोषी करार
दिल्ली की द्वारका जिला कोर्ट ने गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी को पुलिस टीम पर फायरिंग से जुड़े हत्या के प्रयास मामले में दोष मुक्त कर दिया है। काला जठेड़ी के सह-आरोपियों पर कोर्ट ने हत्या की कोशिश, पुलिस पर हत्या और आर्म्स एक्ट के मद्देनजर दोषी करार दिया है। कोर्ट ने चारों अन्य आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में आरोप तय किए हैं। न्यायाधीश रविंद्र सिंह की कोर्ट ने गैंगस्टर काला जठेड़ी को आरोपमुक्त करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने लगाई यह धाराएं
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विक्की और नरेंद्र को गिरफ्तार किया था। मामला बामनोली इलाके में 5 अगस्त 2023 का है। जिसमें जांच के दौरान अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीशरविंदर सिंह ने अन्य आरोपियों के खुलासे के बयान और कोई सबूत न मिलने के अभाव में काला जठेरी को बरी कर दिया है। मामले में कोर्ट ने 4 आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूतों के आधार पर कार्रवाई की।
कोर्ट ने विक्की उर्फ वीरा उर्फ मोटा और नरेंद्र उर्फ बंता के खिलाफ आईपीसी की धारा 186, 353, 307, 34 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25/27 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोप तय किए। आरोपी मनप्रीत गोलू के खिलाफ शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोप तय किए गए हैं। अदालत ने आरोपी कृष्ण के खिलाफ केवल शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत दंडनीय अपराध के लिए आरोप तय किए हैं।
अधिवक्ता सात्विक ने आरोपी संदीप, विक्की और नरेंद्र की तरफ से कोर्ट में बाते रखी। उन्होंने अभियुक्तों की रिहाई के लिए आवेदन दिया। आवेदन पर विचार करने के बाद, न्यायालय ने संदीप उर्फ काला जठेरी को बरी कर दिया।
पुलिस को नहीं मिले काला जठेड़ी के खिलाफ कोई सबूत
दरअसल कोर्ट में इस मामले में काला जठेड़ी की संलिप्तता महज सह-आरोपियों के दिए बयानों पर आधारित दिखाई गई। सभी ने काला जठेड़ी को गैंग का सरगना बताते हुए कथित तौर पर घटना को अंजाम देने के पीछे उसका हाथ बताया। पुलिस कोर्ट के सामने इस मामले में उसका कोई हथियार या गोला-बारूद बरामद नहीं कर पाई।
इसके अलावा, घटनास्थल पर उसकी कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता भी नहीं दिखी। पुलिस की जांच में इस घटना को लेकर काला जठेड़ी की कोई पुरानी रंजिश भी नहीं मिली। न ही कोई गवाह, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरसेप्टेड कम्युनिकेशन या अन्य स्वीकार्य सामग्री रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई है।
जानिए क्या था पूरा मामला?
मामले में पक्षकार ने तर्क देते हुए कहा कि घटना बामनोली इलाके में 5 अगस्त 2023 से जुड़ी है। 12:25 बजे हुई थी। बाइक सवार 2 लोगों को पुलिस ने चैकिंग पॉइंट की तरफ आता हुआ देखा और रुकने का इशारा किया। लेकिन पुलिस को देखते ही दोनों ने भागने की कोशिश की। बाइक पर पीछे बैठे युवक ने एसआई सचिन गुलिया पर जान से मारने की नीयत से गोली चलाई। आत्मरक्षा करते हुए एसआई सचिन गुलिया ने भी फायरिंग की।
इसी बीच बाइक सवार ने कांस्टेबल धीरज पर भी गोली चलाने का प्रयास किया, लेकिन उसकी पिस्तौल से गोली नहीं चली। जिसके बाद कांस्टेबल धीरज ने फायरिंग कर मौके पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। जिनकी पहचान विक्की उर्फ वीरा उर्फ मोटा और नरेंद्र उर्फ बंता के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों के कब्जे से 2 पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद किए थे।
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