टीएमसी के चुनाव चिन्ह और पार्टी के नाम पर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच चल रहे विवाद में चुनाव आयोग ने अहम अंतरिम फैसला लिया है। आयोग ने फिलहाल पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया है। इसका मतलब है कि आगामी उपचुनाव में दोनों गुट इनका इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक अपने लिए नए नाम और चुनाव चिन्ह के तीन-तीन विकल्प देने का निर्देश दिया है। आयोग इन प्रस्तावों में से किसी एक नाम और चिन्ह को मंजूरी दे सकता है।
दोनों पक्षों की अलग-अलग हुई सुनवाई
टीएमसी पर नियंत्रण को लेकर चुनाव आयोग ने गुरुवार, 17 सितंबर को ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट की अलग-अलग सुनवाई की। सुनवाई के दौरान ममता गुट ने किसी भी तरह के अंतरिम आदेश का विरोध किया। वहीं, ऋतब्रत गुट ने मांग की कि पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित उपचुनाव से पहले चुनाव चिन्ह को लेकर जल्द फैसला किया जाए।
ऋतब्रत गुट ने क्या कहा?
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के साथ चंद्रिमा भट्टाचार्य, अकरुल जमान, अरूप रॉय और एक वकील चुनाव आयोग के सामने पेश हुए। प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सभी सदस्यों के सामने अपना पक्ष रखा और पूछे गए सवालों के जवाब दिए। सुनवाई के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि चुनाव चिन्ह का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव प्रस्तावित हैं और दोनों पक्षों के उम्मीदवार नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं।
ममता गुट ने अंतरिम आदेश का किया विरोध
ऋतब्रत गुट के बाद ममता बनर्जी के पक्ष से डेरेक ओब्रायन, कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष चुनाव आयोग के सामने पहुंचे। इस पक्ष ने किसी भी अंतरिम आदेश जारी किए जाने का विरोध किया।
अंतरिम आदेश का कोई आधार नहीं- कल्याण
कल्याण बनर्जी ने सुनवाई के बाद कहा कि ममता गुट ने आयोग से स्पष्ट तौर पर कहा कि अंतरिम आदेश जारी करने का कोई आधार नहीं है और ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया जाना चाहिए।
दोनों गुटों से मांगे गए नाम और चुनाव चिन्ह के तीन विकल्प
अब दोनों गुटों के सामने अपनी पहचान के लिए नए नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प देने की चुनौती है। चुनाव आयोग द्वारा स्वीकृत विकल्प के आधार पर ही दोनों पक्ष आगामी उपचुनाव में चुनावी मैदान में उतर सकेंगे।