अमरावती: आंध्र प्रदेश की राजनीति में शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर सियासत तेज हो गई है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने एक बार फिर मेगा डिस्ट्रिक्ट सिलेक्शन कमेटी (DSC)-2025 शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग की है।

YSRCP युवा विंग के अध्यक्ष जक्कमपुडी राजा ने रविवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली TDP गठबंधन सरकार जांच से बच रही है, क्योंकि उसे मामले के उजागर होने का डर है।

राजा ने कहा कि DSC भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों के मजबूत सबूत सामने आए हैं और सरकार के पास YSRCP प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी द्वारा उठाए गए सवालों का कोई जवाब नहीं है।

शिक्षक पदों की बिक्री के लिए खेल कोटे का दुरुपयोग

उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षक पदों की बिक्री के लिए खेल कोटे का दुरुपयोग किया गया। राजा के मुताबिक, कथित ऑडियो लीक में नौकरियों के लिए तय कीमतों की बात सामने आई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिना अनिवार्य TET परीक्षा पास किए उम्मीदवारों को नौकरी दी गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया गया।

YSRCP नेता ने पिछली सरकार का हवाला देते हुए कहा कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में ग्राम और वार्ड सचिवालयों में बड़ी संख्या में भर्तियां की गई थीं और प्रक्रिया में कोई बड़ी अनियमितता सामने नहीं आई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि DSC मामले से ध्यान हटाने के लिए TDP सरकार ने ग्रुप-1 भर्ती मामले को उठाया है। राजा ने कहा कि जब जगन मोहन रेड्डी ने दोनों मामलों में CBI जांच की मांग की तो सरकार पीछे हट गई।

नारा लोकेश को बचाने के लिए CBI जांच से डर

राजा ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपने बेटे नारा लोकेश को बचाने के लिए CBI जांच से डर रहे हैं। उन्होंने नारा लोकेश के इस्तीफे की भी मांग दोहराई।

उन्होंने कहा कि पहले वाईएस राजशेखर रेड्डी ने आरोप लगने पर CBI जांच की मांग की थी, जबकि मौजूदा सरकार जांच से बच रही है।

इस बीच, YSRCP ने तिरुपति लड्डू विवाद का भी जिक्र किया। पार्टी ने कहा कि चंद्रबाबू नायडू को डर है कि CBI जांच का मुद्दा उनके खिलाफ जा सकता है। तिरुपति लड्डू मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI ने SIT गठित कर जांच शुरू की थी।

TTD को सप्लाई किए गए घी में मिलावट की बात

जांच रिपोर्ट के अनुसार, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को सप्लाई किए गए घी में मिलावट की बात सामने आई थी। रिपोर्ट में पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और कुछ रसायनों के इस्तेमाल का जिक्र किया गया था। हालांकि, SIT रिपोर्ट में पशु वसा के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं की गई थी।

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