Gaganyaan Mission: इसरो इस साल अंतरिक्ष में जल्द ही एक और बड़ी उपलब्धि गगनयान मिशन का पहला मानवरहित मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने शुक्रवार को कहा कि गगनयान कार्यक्रम के तहत पहले मानवरहित मिशन पर काम तेजी से और व्यवस्थित रूप से किया जा रहा है और इसकी लॉन्चिंग इसी साल किया जाएगा। जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट पर सवार ईओएस-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के सफल लॉन्चिंग को लेकर बोलते हुए वी. नारायणन ने कहा कि यह मिशन चालू वित्तीय वर्ष में अंतरिक्ष एजेंसी के लिए पहली सफलता थी।
मिशन की तैयारियां तेजी से चल रही
वी.नारायणन ने कहा, "कड़ी मेहनत का इनाम और अधिक काम है," और साथ ही यह भी कहा कि आईएसआरओ, उद्योग और अन्य संगठनों के साथ मिलकर, अब पहले मानवरहित गगनयान मिशन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। नारायणन ने कहा कि मिशन की तैयारियां तेजी से चल रही हैं और इस साल के अंत से पहले प्रक्षेपण का लक्ष्य रखा गया है। यह मानवरहित मिशन भारत के नियोजित मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह उपग्रह है एक "जासूसी उपग्रह"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए नारायणन ने कहा कि आईएसआरओ ने चालू वित्त वर्ष के दौरान नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-3 सहित छह और प्रक्षेपणों की योजना बनाई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नारायणन ने कहा कि ईओएस-05 का परिचालन जीवन 9 वर्ष है। उन्होंने इस अटकल को भी खारिज कर दिया कि यह उपग्रह एक "जासूसी उपग्रह" है।
अंतरिक्ष के यात्रियों को लाया जाए सुरक्षित
दरअसल गगनयान भारत का पहला मिशन ऐसा मिशन होगा, जिसके जरिए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष की कक्षा में भेजने की तैयारी की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत यात्रियों को पृथ्वी से तकरीबन 400 किलोमीटर ऊपर भेजा जाएगा। फिर उन्हें सुरक्षित वापस भी लाया जाएगा। इंसानों को भेजने से पहले इसरों बिना इंसान के ही गगनयान को अंतरिक्ष में भेजकर उसकी जांच करेगा। इस दौरान रॉकेट सही तरीके से उड़ा है या नहीं और क्रू मॉड्यूल अंतरिक्ष में ठीक काम करता है या नहीं, इसका भी हर हरकत पर नजर रखी जाएगी।
धरती पर वापसी भी जरूरी
गगनयान मिशन सिर्फ अंतरिक्ष तक उड़ान भरने तक नहीं है। इसके जरिए अंतरिक्ष से यात्रियों को सुरक्षित धरती पर वापस लाने के लिए भी इस मिशन का सफल होना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए क्रू मॉड्यूल में पैराशूट लगाने पर भी काम किया जा रहा है। पैराशूट मॉड्यूल की रफ्तार को धीमा रखेंगे, जिससे वह समुद्र में सुरक्षित उतर सकें। पैराशूट सिस्टम को भी पूर्व में कई बार टेस्ट किया जा चुका है। ऐसे में आने वाले समय में इसे सफल बनाने पर काम किया जा रहा है।
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