गोगा नवमी 2026: आज यानी शनिवार को गोगा जी महाराज का जन्मोत्सव है। जन्माष्टमी के ठीक अगले दिन गोगा नवमी आती है। गोगा जी महाराज को मुख्यत: प्रसिद्ध और चमत्कारी लोक देवता के रूप में माना जाता है। कुछ लोग इन्हें 'jaharveer Gogaji' और 'नागों के देवता' भी कहते हैं। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित गोगामेड़ी मंदिर में आज यानी भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की नवमी पर बहुत बड़ा मेला लगता है। देश से ही नहीं बल्कि विदेशों के नागरिक भी इस मेले को देखने पहुंचते हैं। गोगा जी महाराज को गुरु गोरखनाख का आशीर्वाद प्राप्त था।
चौहान वंश में पृथ्वीराज चौहान के बाद गोगाजी ही रहे अगले वीर
गोगा जी महाराज का जन्म राजस्थान के चूरू में चौहान वंश में हुआ था। उनकी माता का नाम बाछल और पिता का नाम राजा जेवर सिंह था। चौहान वंश में पृथ्वीराज चौहान के बाद गोगाजी ही अगले वीर राजाओं में प्रसिद्ध है। गोगाजी का राज्य सतलुज से हरियाणा के हांसी तक था। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित गोगामेड़ी मंदिर में आज यानी भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की नवमी पर मेला लगता है। गोगा जी को सांपों का रक्षक और सांपों का देवता भी कहा जाता है। इसके अलावा गोगोजी, गुगा वीर, जाहर वीर, जाहर पीर, राजा मण्डलिक आदि नामों से भी उनके श्रद्धालु उन्हें पुकारते हैं।
साम्प्रदायिक सद्भाव का दिखता है अनूठा संगम
गोगाजी को साहस वाले योद्धा-संत के रूप में लोग याद करते हैं और लोक कथाओं में उन्हें सांप के काटने और जहर से रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजते हैं। गोगा नवमी की परंपरा का पालन करने वालों के लिए यह सिर्फ एक तिथि नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही है रीति-रिवाजों का हिस्सा है। भक्तजन आज भी गोगादेव की पूजा के लिए गोगाजी के पवित्र धाम गोगामेड़ी जाते हैं। यहां से गोगामेड़ी स्थित गोगाजी का समाधि स्थल मजह 80 किलो मीटर दूर है। जहां साम्प्रदायिक सद्भाव का अनूठा संगम देखने को मिलता है,जहां एक हिन्दू व एक मुस्लिम पुजारी खड़े रहते हैं। वीर गोगाजी की समाधि के पास गोगा वीर व जाहिर वीर के जयकारों वातावरण को पवित्र बना देते हैं।
मुख्य कथा इस प्रकार है
कहते हैं कि गुरु गोरखनाथ के वरदान से ही महापुरुष गोगाजी का जन्म हुआ था। गोगाजी की मां बाछल काफी समय तक नि संतान रही। एक बार गुरु गोरखनाथ गोगामेड़ी के टीले पर तप कर रहे थे। जहां बाछल देवी पहुंची गुरु गोरखनाथ ने बाछल जी को गुगल नामक एक फल प्रसाद में दिया। जिसे खाने से वह गर्भवती हो गई। गुगल फल खाने के बाद गोगाजी का जन्म हुआ था। जिससे इनका नाम गोगाजी पड़ा।
कैसे करें गोगाजी की पूजा
गोगा नवमी पर सबसे पहले घर में साफ सफाई करें। पूजा के लिए स्थान चुन लें। इसके बाद गोगाजी की तस्वीर के आगे दूध, खीर, चूरमा, फल, फूल भेंट करें।