जन्माष्टमी का त्यौहार भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना करते हैं। अगर आप भी इस बार जन्माष्टमी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो व्रत शुरू करने से लेकर पूजा और पारण तक कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

सुबह ऐसे शुरू करें व्रत
जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई करें। भगवान श्रीकृष्ण के सामने दीपक जलाकर व्रत रखने का संकल्प लें। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखा जा सकता है।

व्रत में क्या खा सकते हैं?
फलाहार व्रत रखने वाले लोग फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें खा सकते हैं। सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। अनाज, सामान्य नमक और कई घरों में दाल-सब्जियों का सेवन व्रत में नहीं किया जाता। हालांकि व्रत के नियम अलग-अलग परंपराओं में अलग हो सकते हैं।

शाम को ऐसे करें पूजा की तैयारी
शाम के समय भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या लड्डू गोपाल को स्नान कराकर साफ वस्त्र पहनाएं। उन्हें मुकुट, मोरपंख और फूलों से सजाएं। पूजा की जगह पर बाल गोपाल के लिए छोटी सी झांकी भी तैयार कर सकते हैं।

रात 12 बजे ऐसे करें कान्हा जी की पूजा
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय रात 12 बजे माना जाता है। इस समय शंख बजाकर भगवान का स्वागत करें। दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल आदि से अभिषेक कर सकते हैं। इसके बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाएं और फूल, माला, तुलसी दल, माखन-मिश्री और अन्य भोग अर्पित करें। इसके बाद “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे” जैसे कृष्ण नाम का जाप करें और भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें।

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भोग में क्या चढ़ाएं?
कान्हा जी को माखन-मिश्री विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। इसके अलावा फल, मिठाई, पंचामृत, धनिया पंजीरी और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य सात्विक पकवान भोग में रख सकते हैं।

व्रत कब खोलें?
व्रत खोलने यानी पारण का समय स्थानीय पंचांग और आपकी परंपरा के अनुसार देखना चाहिए। कई लोग आधी रात जन्माष्टमी पूजा के बाद अगले दिन पारण करते हैं। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग में दिए गए पारण समय का पालन करना बेहतर होता है।

इन बातों का रखें ध्यान

* अपनी सेहत के अनुसार ही व्रत रखें।
* व्रत में पर्याप्त पानी और फलाहार लें, यदि आपकी व्रत-पद्धति इसकी अनुमति देती है।
* पूजा में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
* भगवान को भोग लगाने से पहले भोजन न करें, यदि आपकी परंपरा में ऐसा नियम है।
* गर्भवती, बुजुर्ग, बच्चे या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोग बिना सलाह के कठिन निर्जला व्रत न रखें।