UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। चुनाव में अभी कई महीने बाकी हैं, लेकिन राजनीतिक दलों की नजर अभी से प्रदेश के युवा मतदाताओं पर टिक गई है। जेन-जी के साथ अब जेन अल्फा की नई पीढ़ी को लेकर भी राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। कहीं सरकारी नौकरी और टैबलेट का वादा है, तो कहीं लैपटॉप, शिक्षा, रोजगार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को चुनावी एजेंडे में जगह दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश में युवाओं से जुड़े मुद्दे हाल के दिनों में राजनीति के केंद्र में रहे हैं। बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के खिलाफ युवाओं की आवाज ने राजनीतिक दलों को भी अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। अब पार्टियां केवल बड़ी रैलियों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और युवा संगठनों के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंच बनाने में जुटी हैं।
BJP के पिटारे में नौकरी, रोजगार और 25 लाख टैबलेट
प्रदेश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी युवाओं को सरकारी नौकरी, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों के जरिए साधने की कोशिश में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार युवा कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आ रहे हैं और सरकार युवाओं को लेकर अपनी योजनाओं को प्रमुखता से प्रचारित कर रही है। योगी सरकार ने अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को नौकरी के नियुक्ति पत्र देने की घोषणा की है। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले 500 खिलाड़ियों को भी नियुक्ति पत्र देने की बात कही गई है।
सरकार अपने कार्यकाल के दौरान अब तक करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को नौकरी देने का दावा भी कर रही है। इसके साथ ही स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सीएम उद्यमी योजना और युवाओं को डिजिटल इंटरप्रेन्योर के रूप में विकसित करने जैसी योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। युवाओं को तकनीक से जोड़ने के लिए योगी कैबिनेट ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट वितरित करने की योजना को मंजूरी दी है। करीब 24 हजार करोड़ रुपये की इस योजना के तहत ग्रेजुएशन, पोस्ट-ग्रेजुएशन, तकनीकी शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम से जुड़े छात्रों को टैबलेट देने की तैयारी है।
क्या सत्ता में लौटने पर फिर लैपटॉप बांटेगी सपा?
समाजवादी पार्टी भी युवाओं को मिशन-2027 की रणनीति का अहम हिस्सा मान रही है। पार्टी बेरोजगारी, पेपर लीक और रोजगार के मुद्दों को लगातार उठा रही है। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहने के दौरान 12वीं पास छात्रों को बड़ी संख्या में लैपटॉप वितरित किए गए थे। अब एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि अगर 2027 में सपा सत्ता में आती है तो क्या छात्रों को लैपटॉप या आईपैड मिलेगा?
इस सवाल पर अखिलेश यादव ने हाल ही में कोई सीधा चुनावी वादा नहीं किया, लेकिन उन्होंने कहा कि वह बच्चों से पूछेंगे कि उन्हें लैपटॉप चाहिए या आईपैड। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए लैपटॉप अधिक उपयोगी हो सकता है और समाजवादी सरकार तकनीक को शिक्षा से जोड़ने वाला फैसला करेगी। सपा ने हर तहसील में कॉलेज और छात्राओं के लिए हॉस्टल खोलने की बात भी कही है। खास बात यह है कि पार्टी युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए अपनी पारंपरिक चुनावी शैली में बदलाव कर रही है। रैलियों और जनसभाओं के साथ-साथ सोशल मीडिया, डिजिटल कंटेंट और इनफ्लुएंसर्स के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति पर काम हो रहा है।
मिलेनियल्स चेहरे आकाश आनंद के भरोसे बसपा
बहुजन समाज पार्टी भी युवा मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी अपनी डिजिटल मौजूदगी बढ़ाने के साथ बूथ स्तर पर पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम कर रही है। बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को मिशन-2027 में अहम जिम्मेदारी दी गई है। 31 वर्षीय आकाश आनंद खुद जेन-जी नहीं बल्कि मिलेनियल्स पीढ़ी से आते हैं, लेकिन उनका चुनावी अभियान नई पीढ़ी के मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करता नजर आ रहा है। उनका फोकस दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं को बसपा से जोड़ने पर है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक युवाओं के लिए कोई बड़ा और स्पष्ट चुनावी पैकेज सामने नहीं आया है।
'छात्रों की गूंज' से युवाओं तक पहुंच बनाने में जुटी कांग्रेस
कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में युवाओं के मुद्दों को लेकर सक्रिय है। पार्टी ने पेपर लीक के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन किए और रोजगार तथा शिक्षा को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कांग्रेस ने 'छात्रों की गूंज' नाम से कार्यक्रम शुरू किया, जिसका आयोजन प्रयागराज में किया गया। पार्टी की रणनीति युवाओं को जाति और धर्म की राजनीति से अलग रोजगार, शिक्षा और भविष्य के मुद्दों पर जोड़ने की है। हालांकि 2027 के चुनाव के लिए कांग्रेस ने अभी तक उत्तर प्रदेश के युवाओं के नाम कोई बड़ा और स्पष्ट चुनावी वादा नहीं किया है। पार्टी ने 2022 विधानसभा चुनाव में युवाओं के लिए अलग घोषणा पत्र जारी किया था। इसमें 20 लाख सरकारी नौकरियां देने और परीक्षा, रिजल्ट तथा नियुक्ति की तारीख तय करने के लिए जॉब कैलेंडर बनाने का वादा किया गया था।
2027 में युवा वोटर बन सकते हैं सबसे बड़ा गेमचेंजर
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में युवाओं का मुद्दा सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहने वाला है। नई पीढ़ी शिक्षा, तकनीक, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, स्वरोजगार और डिजिटल अवसरों जैसे सवालों पर राजनीतिक दलों से जवाब मांग सकती है। बीजेपी के पास नौकरी, रोजगार और टैबलेट योजनाओं का दावा है तो सपा एक बार फिर लैपटॉप और शिक्षा को तकनीक से जोड़ने के संकेत दे रही है। बसपा युवा संगठन और आकाश आनंद के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जबकि चंद्रशेखर आजाद आंदोलन और सामाजिक न्याय के मुद्दों के सहारे युवाओं में अपनी जगह मजबूत करना चाहते हैं। कांग्रेस भी रोजगार और शिक्षा के मुद्दों को लेकर युवाओं के बीच सक्रियता बढ़ा रही है।
अब बड़ा सवाल यही है कि 2027 में जेन-जी और आने वाली नई युवा पीढ़ी किसके वादों पर भरोसा करेगी और किस पार्टी को अपना समर्थन देगी। यूपी की सत्ता की लड़ाई में युवा वोटर इस बार सबसे बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकते हैं।
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