आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने डेटा सेंटर की मांग को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचा दिया है। AI मॉडल को चलाने के लिए बेहद शक्तिशाली कंप्यूटिंग सिस्टम की जरूरत होती है, जिसके लिए बड़े पैमाने पर सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए। यही वजह है कि अब टेक कंपनियां धरती के बजाय अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रही हैं।
एलन मस्क की SpaceX ने कही ये बात
एलन मस्क की SpaceX, जेफ बेजोस की Blue Origin और Google जैसी कंपनियां स्पेस-बेस्ड कंप्यूटिंग की दिशा में रिसर्च कर रही हैं। हाल ही में SpaceX ने स्टारमाइंड प्रोजेक्ट के तहत अंतरिक्ष में बड़ी संख्या में AI सैटेलाइट भेजने की योजना का ऐलान किया था। कंपनियों का मानना है कि अंतरिक्ष में मौजूद सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करके बिजली की जरूरत पूरी की जा सकती है और जमीन पर विशाल डेटा सेंटर बनाने से जुड़ी चुनौतियों को कम किया जा सकता है। हालांकि, इस विचार को लेकर वैज्ञानिक समुदाय पूरी तरह सहमत नहीं है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष में बड़े पैमाने पर सैटेलाइट और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भेजने से पहले इसके पर्यावरणीय और वैज्ञानिक प्रभावों का गंभीर अध्ययन जरूरी है।
AI सेवाओं के लिए डेटा सेंटर क्यों हैं जरूरी?
AI सिस्टम को काम करने के लिए इंटरनेट की तरह ही कंप्यूटर सर्वर और बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता होती है। आधुनिक AI मॉडल इतने जटिल हो चुके हैं कि उन्हें चलाने के लिए हजारों सर्वरों वाले बड़े डेटा सेंटर की जरूरत पड़ती है। ये डेटा सेंटर कई एकड़ क्षेत्र में फैले हो सकते हैं और इन्हें लगातार बिजली की आपूर्ति चाहिए होती है। सर्वर लगातार काम करते हैं, जिससे भारी मात्रा में गर्मी पैदा होती है। इस गर्मी को नियंत्रित रखने के लिए अत्याधुनिक कूलिंग सिस्टम लगाए जाते हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में पानी और ऊर्जा की खपत होती है। कई बड़े डेटा सेंटर एक छोटे शहर जितनी बिजली और पानी की खपत कर सकते हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई हिस्सों में इनके निर्माण और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर विरोध भी देखने को मिला है।
अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने का विचार क्यों आया?
धरती पर डेटा सेंटर बनाने में बिजली, पानी, जमीन और पर्यावरण से जुड़े कई सवाल उठते हैं। इन चुनौतियों को देखते हुए कंपनियां अब अंतरिक्ष को एक संभावित विकल्प के रूप में देख रही हैं। अंतरिक्ष में सोलर एनर्जी की उपलब्धता बहुत अधिक होती है, जिससे लंबे समय तक बिजली उत्पादन की संभावना बनती है। इसके अलावा वहां जमीन की कमी जैसी समस्या नहीं है, क्योंकि डेटा सेंटर को ऑर्बिट में स्थापित किया जा सकता है। Google ने भी अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग हार्डवेयर भेजने के विचार को लंबे समय तक चलने वाली रिसर्च का विषय बताया है। कंपनी SpaceX के साथ मिलकर ऑर्बिट में कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। वहीं Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस का मानना है कि आने वाले 10 से 20 वर्षों में अंतरिक्ष में डेटा सेंटर वास्तविकता बन सकते हैं।
वैज्ञानिक क्यों जता रहे हैं खतरा?
पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरिक्ष में डेटा सेंटर के फायदे देखने के साथ-साथ इसके संभावित नुकसान पर भी ध्यान देना जरूरी है। पर्यावरण समूहों की ओर से काम करने वाले संगठन Earthjustice ने अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) से सैटेलाइट प्रोजेक्ट्स की गहन समीक्षा की मांग की है।
विशेषज्ञों को चिंता है कि बड़े पैमाने पर सैटेलाइट लॉन्च होने से कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जैसे:
पृथ्वी के वातावरण में प्रदूषण बढ़ना
ओजोन परत को नुकसान पहुंचने का खतरा
अंतरिक्ष में मलबे (Space Debris) की मात्रा बढ़ना
रात के आसमान की प्राकृतिक स्थिति में बदलाव
वन्यजीवों और मानव स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव
वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि अंतरिक्ष में सैटेलाइट की संख्या बढ़ने से खगोलीय अनुसंधान प्रभावित हो सकता है। अधिक सैटेलाइट होने की वजह से धरती पर मौजूद शक्तिशाली टेलीस्कोप के लिए अंतरिक्ष का अध्ययन करना मुश्किल हो सकता है।
तेजी से बढ़ रही है सैटेलाइट की संख्या
अंतरिक्ष में सैटेलाइट की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। European Southern Observatory के अनुसार, हाल के वर्षों में ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। केवल Starlink के हजारों सैटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में मौजूद हैं। कुछ वर्षों पहले तक जहां अंतरिक्ष में मौजूद कुल सैटेलाइट की संख्या काफी कम थी, वहीं अब कई कंपनियां आने वाले समय में और बड़े सैटेलाइट नेटवर्क लॉन्च करने की योजना बना रही हैं। AI की बढ़ती जरूरतों ने अंतरिक्ष आधारित डेटा सेंटर की संभावनाओं को जन्म दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले तकनीकी विकास के साथ-साथ पर्यावरण और अंतरिक्ष सुरक्षा के पहलुओं पर भी बराबर ध्यान देना होगा।
Written By Toshi Shah