बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथनेसिया मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा को इच्छामृत्यु की मंजूरी दे दी है। बता दें, भारत में पैसिव यूथनेसिया यानी इच्छामृत्यु का यह पहला मामला है। बता दें, यह फैसला जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सुनाया।

हरीश राणा को क्यों मिली इच्छामृत्यु

11 मार्च बुधवार को पैसिव यूथनेसिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के 32 साल के हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी। शुरूआती जानकारी के मुताबिक हरीश राणा पिछले 12 साल से अचेत अवस्था में बिस्तर पर पड़े हैं। बताया जा रहा कि कॉलेज में एक दुर्घटना के दौरान हरीश के सिर में चोट लगी, जिसके बाद उसके ब्रेन को नुकसान पहुंचा। तब से वह इसी हालत में है। यही वजह है कि एक पिता ने अपनी ही बेटे की मौत की सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। और आज इसपर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए हरीश राणा को इच्छामृत्यु को मंजूरी दे दी।

क्या होता है पैसिव यूथेनेशिया?

जैसे की आप जानते है कि सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया मामले में 31 साल के हरीश राणा को इजाजत दे दी। अब लोगों के मन सवाल उठ रहा है कि आखिर पैसिव यूथेनेशिया क्या है और इसका मतलब क्या होता है? आपके सभी सवालों को दूर करते हुए बता दें, कि पैसिव यूथेनेशिया एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी मरीज को जान-बूझकर मरने दिया जाता है। इसमें मरीज की लाइफ सपोर्ट या जिंदा रखने के लिए जरूरी इलाज रोक दिया जाता है या हटा दिया जाता है। जिससे मरीज की मौत हो जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

वहीं कोर्ट ने हरीश राणा को पैसिव यूथनेसिया (इच्छामृत्यु) देने की मांग पर फैसला सुनाते हुए उसे इच्छामृत्यु की मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने आगे कहा है कि हरीश राणा को AIIMS के पैलिएटिव केयर में भर्ती किया जाएगा ताकि मेडिकल ट्रीटमेंट वापस लिया जा सके। बता दें कि भारत में ये पैसिव यूथेनेसिया का पहला मामला है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पारदीवाला ने कहा था कि यह बेहद दुःखद रिपोर्ट है। यह हमारे लिए मुश्किल फैसला है। हम उस स्टेज में है जहां आज हमें आखिरी फैसला लेना होगा।

12 सालों से बिस्तर पड़े थे हरीश राणा

जानकारी के लिए बता दें कि हरीश अपने माता-पिता के साथ गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में रहते है। वे पिछले 12 साल से ज्यादा समय से बिस्तर पर ही सांसें ले रहे हैं। इस दौरान हरीश को तरल भोजन दिया जाता है। बताया जा रहा कि हरीश राणा साल 2013 में घर की चौथी मंजिल से गिर गए, जिसके बाद उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। तब से वे से ज्यादा समय से कोमा में हैं। वहीं बेंच ने AIIMS को हरीश को पैलिएटिव केयर में एडमिशन देने का निर्देश दिया। ताकि मेडिकल ट्रीटमेंट वापस लिया जा सके। इसके अलावा बेंच ने यह भी बताया कि यह तय किया जाना चाहिए कि इसे एक खास योजना के साथ वापस लिया जाए ताकि इज्जत बनी रहे।

Writen By: Geeta Sharma