आज के समय में मदरहुड को लेकर महिलाओं की सोच काफी बदल गई है। पहले जहां सबसे बड़ा सवाल यही होता था कि परिवार शुरू करने का सही समय क्या है, वहीं अब कई महिलाएं अपनी फर्टिलिटी को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने के विकल्पों पर भी विचार कर रही हैं। इसी वजह से एग फ्रीजिंग और IVF जैसी प्रक्रियाओं को लेकर लोगों की रुचि बढ़ी है। हालांकि, कई लोगों को लगता है कि दोनों एक ही प्रक्रिया हैं, जबकि मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार इनके उद्देश्य और इस्तेमाल में बड़ा अंतर होता है।
एग फ्रीजिंग क्या है और क्यों चुना जाता है?
फर्टिलिटी विशेषज्ञों के मुताबिक, एग फ्रीजिंग उन महिलाओं के लिए एक प्रिवेंटिव विकल्प है जो किसी कारण से अभी गर्भधारण नहीं करना चाहतीं, लेकिन भविष्य में मां बनने की संभावना को सुरक्षित रखना चाहती हैं। इस प्रक्रिया में महिला को लगभग 10 से 12 दिनों तक हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं, जिससे ओवरी में कई परिपक्व अंडे विकसित हो सकें। इसके बाद इन एग्स को निकालकर बिना निषेचन (फर्टिलाइजेशन) के फ्रीज कर दिया जाता है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन्हीं सुरक्षित एग्स को इस्तेमाल करके IVF की मदद से गर्भधारण की कोशिश की जा सकती है।
कम उम्र में एग फ्रीजिंग क्यों हो सकता है फायदेमंद?
विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ एग्स की संख्या और उनकी गुणवत्ता कम होने लगती है। इसलिए कम उम्र में एग फ्रीजिंग करवाना ज्यादा प्रभावी माना जाता है। यह विकल्प उन महिलाओं के लिए भी उपयोगी हो सकता है जिन्हें कैंसर जैसी बीमारी के इलाज, खासकर कीमोथेरेपी, से गुजरना पड़ सकता है।
क्या एग फ्रीजिंग से भविष्य में मां बनने की गारंटी मिलती है?
एग फ्रीजिंग को लेकर एक आम गलतफहमी यह है कि इससे भविष्य में बच्चा होना निश्चित हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार ऐसा नहीं है। एग फ्रीजिंग केवल महिला की प्रजनन क्षमता की संभावना को सुरक्षित रखने का एक तरीका है। बाद में गर्भधारण सफल होगा या नहीं, यह कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे फ्रीज किए गए एग्स की गुणवत्ता, उन्हें पिघलाने के बाद उनकी स्थिति, सफल निषेचन और महिला का स्वास्थ्य।
IVF क्या है और इसका उद्देश्य क्या होता है?
IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक अलग प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से बांझपन की समस्या के इलाज के लिए किया जाता है। इसमें भी महिला के अंडों को विकसित करने के लिए हार्मोनल दवाएं दी जाती हैं और फिर एग्स को निकाला जाता है। लेकिन एग फ्रीजिंग के विपरीत, IVF में एग्स को तुरंत लैब में स्पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है, जिससे भ्रूण (एम्ब्रियो) तैयार होता है। इसके बाद इस भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। IVF उन मामलों में मददगार हो सकता है जहां फैलोपियन ट्यूब में समस्या हो, स्पर्म काउंट कम हो, ओव्यूलेशन से जुड़ी परेशानी हो या उम्र के कारण गर्भधारण में दिक्कत आ रही हो।
फर्टिलिटी के लिए उम्र क्यों है महत्वपूर्ण?
डॉक्टरों के अनुसार, महिलाओं की प्रजनन क्षमता उम्र के साथ धीरे-धीरे कम होने लगती है। आमतौर पर 30 साल के बाद इसमें गिरावट शुरू हो सकती है और 35 साल के बाद यह प्रक्रिया तेज हो जाती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर 12 महीने तक नियमित प्रयास के बाद भी गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो जांच करवानी चाहिए। वहीं 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को लगभग 6 महीने की कोशिश के बाद ही फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेने पर विचार करना चाहिए।
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एग फ्रीजिंग या IVF: कौन-सा विकल्प बेहतर है?
एग फ्रीजिंग और IVF को एक-दूसरे का विकल्प या मुकाबला नहीं माना जा सकता, क्योंकि दोनों का उद्देश्य अलग-अलग होता है। जो महिलाएं अभी मां बनने की योजना नहीं बना रही हैं लेकिन भविष्य के लिए अपनी फर्टिलिटी सुरक्षित रखना चाहती हैं, उनके लिए एग फ्रीजिंग एक विकल्प हो सकता है। वहीं जिन कपल्स को गर्भधारण में समस्या आ रही है, उनके लिए IVF उपचार का एक माध्यम हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फर्टिलिटी से जुड़े फैसलों में सबसे जरूरी है सही समय पर सही जानकारी हासिल करना। अपनी उम्र, स्वास्थ्य और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर से सलाह लेना महिलाओं को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है।
Written By Toshi Shah