अमेरिका की नई वीजा नीति ने दुनियाभर में हलचल मचा दी है। खासकर भारत और चीन जैसे देशों के छात्रों और प्रोफेशनल्स पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। स्टूडेंट और H-1B वीजा में आई गिरावट से यह साफ हो गया है कि अब अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी पाना पहले जितना आसान नहीं रहा।

वीजा में आई बड़ी गिरावट
नई सख्ती के बाद अमेरिका द्वारा जारी किए जाने वाले कुल वीजा की संख्या में कमी आई है। पहले जहां बड़ी संख्या में लोग हर साल वीजा हासिल कर लेते थे, अब वहां आवेदन के बावजूद मंजूरी मिलना मुश्किल हो गया है। इसका असर सिर्फ एक कैटेगरी तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग तरह के वीजा पर देखने को मिल रहा है।

स्टूडेंट्स पर सबसे ज्यादा असर
विदेश में पढ़ाई का सपना देखने वाले छात्रों के लिए यह बदलाव बड़ा झटका साबित हुआ है। खासकर भारतीय और चीनी छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। सख्त नियमों, लंबी जांच प्रक्रिया और अनिश्चितता के कारण अब कई छात्र अमेरिका की बजाय दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं।

H-1B वीजा भी प्रभावित हुआ
आईटी और टेक सेक्टर में काम करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए H-1B वीजा अहम माना जाता है, लेकिन अब इसमें भी कमी आई है। कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को हायर करने में पहले से ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ कर्मचारियों बल्कि कंपनियों की योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है।

आगे चलकर बढ़ सकती हैं मुश्किलें
आने वाले समय में इस नीति का असर और भी साफ दिखाई दे सकता है। अगर वीजा नियम इसी तरह सख्त रहे, तो अमेरिका में पढ़ने और काम करने का सपना देखने वाले लोगों की संख्या कम हो सकती है। इसका असर वहां की कंपनियों और यूनिवर्सिटीज़ पर भी पड़ सकता है, क्योंकि उन्हें ग्लोबल टैलेंट कम मिलेगा। वहीं, भारत और चीन जैसे देशों के छात्र और प्रोफेशनल अब दूसरे देशों की तरफ रुख कर सकते हैं, जहां मौके ज्यादा आसान हैं।

Written by: Anushka sagar