UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के फॉर्मूले को दोहराने की तैयारी में है। इसी रणनीति के तहत सपा कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाए रखने के पक्ष में है, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से दूरी बनाए रखने के संकेत दे रही है।
सूत्रों के मुताबिक, AIMIM की ओर से भाजपा के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद सपा नेतृत्व फिलहाल इस पर सकारात्मक नहीं है। पार्टी का मानना है कि ओवैसी की पार्टी के साथ खुला गठबंधन उसकी व्यापक सामाजिक विस्तार की रणनीति को नुकसान पहुंचा सकता है।
सपा अब खुद को केवल मुस्लिम समर्थक दल की पारंपरिक छवि तक सीमित नहीं रखना चाहती। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 80 में से केवल चार मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे और सभी जीतकर संसद पहुंचे। पार्टी ने PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के सामाजिक समीकरण पर जोर दिया, लेकिन अल्पसंख्यक राजनीति का आक्रामक प्रदर्शन करने से परहेज किया।
सूत्रों का कहना है कि सपा को आशंका है कि AIMIM के साथ गठबंधन होने पर भाजपा एक बार फिर उस पर "मुस्लिम तुष्टीकरण" का आरोप लगा सकती है। इसी वजह से पार्टी फिलहाल ओवैसी से दूरी बनाए रखने को राजनीतिक रूप से बेहतर मान रही है। हालांकि, मुस्लिम-यादव (MY) वोट बैंक सपा की राजनीति का अहम आधार बना रहेगा, लेकिन पार्टी इसे व्यापक PDA गठजोड़ के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना चाहती है। इसके साथ ही गैर-यादव पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जाति के मतदाताओं को साधने पर भी विशेष फोकस रहेगा।
सूत्रों के अनुसार, 2027 के चुनाव में सपा 2022 विधानसभा चुनाव की बजाय 2024 लोकसभा चुनाव की रणनीति अपनाएगी। सामान्य सीटों पर अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की योजना है। अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद की जीत को पार्टी सामाजिक संदेश के तौर पर पेश करती रही है और उन्हें इस रणनीति का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। इसके अलावा, टिकट वितरण में सामाजिक संतुलन बनाए रखना और परिवारवाद के आरोपों से बचना भी सपा के सामने बड़ी चुनौती होगी। पार्टी बहुसंख्यक समाज में स्वीकार्यता बढ़ाने और व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व के जरिए 2027 में सत्ता तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है।
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