UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है, और इस बार राजनीति का केंद्र बिंदु ‘डी’ यानी दलित फैक्टर बनता दिख रहा है। आपको बता दें कि प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 21 से 22 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले दलित वोटर्स को लुभाने के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने हाल ही में पेश किए गए अनुपूरक बजट में 'डॉ.बी.आर.अंबेडकर मूर्ति विकास योजना' के तहत 407 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है।

2024 के झटके के बाद बीजेपी की 'कोर्स करेक्शन' की कोशिश
2024 के लोकसभा चुनावों में यूपी के भीतर विपक्ष (सपा-कांग्रेस गठबंधन) ने संविधान और आरक्षण के मुद्दे को भुनाते हुए दलित वोट बैंक के एक बड़े हिस्से में सेंध लगा दी थी। सपा ने 17 आरक्षित सीटों में से 7 सीटों पर जीत हासिल की। इसी राजनीतिक नुकसान की भरपाई करने और 2027 में सत्ता बरकरार रखने के लिए बीजेपी अब हर संभव कोशिश में जुटी है ।

क्या है योजना और कैसे होगा खर्च?
सरकार द्वारा मंजूर की गई इस योजना का सीधा मकसद दलित महापुरुषों के सम्मान के जरिए वोटर्स के दिलों में जगह बनाना है, यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों में डॉ. अंबेडकर और अन्य महापुरुषों के स्मारकों/प्रतिमाओं के विकास के लिए धनराशि आवंटित की जाएगी। प्रतिमा स्थलों पर सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल, ऊपर शेड/छत्र, सौंदर्यीकरण और लाइटिंग का काम कराया जाएगा। योजना के अंतर्गत डॉ. अंबेडकर के अलावा संत रविदास, संत कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि के स्मारकों एवं स्थलों का भी जीर्णोद्धार होगा।

क्यों अहम है यह वर्ग?
उत्तर प्रदेश में दलित मतदाता किसी भी दल का खेल बनाने या बिगाड़ने का माद्दा रखते हैं, 21-22% दलित आबादी राज्य की 85 आरक्षित सीटों के साथ-साथ 140 से अधिक सामान्य सीटों के नतीजों को सीधे प्रभावित करती है। कुल दलित आबादी में लगभग 11% आबादी जाटव समाज की है, जो परंपरागत रूप से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का कोर वोटर माना जाता है। वहीं पासी (15.8%), कोरी, धोबी और वाल्मीकि जैसी गैर-जाटव जातियां बाकी का हिस्सा बनाती हैं, जिन पर बीजेपी की खास नजर रहती है। बुंदेलखंड (झांसी, जालौन, चित्रकूट) के जिलों में दलित आबादी 25% से अधिक है। इसके अलावा पश्चिमी यूपी (बिजनौर, आगरा, सहारनपुर, बुलंदशहर) और पूर्वी यूपी (आजमगढ़, जौनपुर, चंदौली) में भी दलित वोटर्स का भारी दबदबा है।

सपा का 'PDA' और कांग्रेस का संगठनात्मक फेरबदल
अखिलेश यादव 2024 की सफलता के बाद अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूत कर रहे हैं। पार्टी सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना और आरक्षण के मुद्दे को 2027 के चुनाव में प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। कांग्रेस ने यूपी मामलों का प्रभार दलित समाज से आने वाले पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को सौंपकर यह संदेश दिया है कि वह अपने पुराने दलित जनाधार को वापस पाने के लिए पूरी तरह गंभीर है। 

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 Written by Shailesh Yadav