मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब वैश्विक आर्थिक संकट में बदलता जा रहा है। बता दें, तेल सप्लाई बाधित होने से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ गई है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब देशों और आम लोगों पर पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष की वजह से करीब 3.25 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जा चुके हैं, और कुछ जाने की कगार पर हैं।

होर्मुज बंद होने से बढ़ा संकट

जानकारी के लिए बता दें, तेल सप्लाई का सबसे अहम रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय तनाव का केंद्र बना हुआ है। यहां अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान की जवाबी कार्रवाई से तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर ये हुआ कि ग्लोबल ऑयल सप्लाई घट गई। शिपिंग और बीमा लागत बढ़ गई। जिस वजह से कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 90-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।

भारत पर असर

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। लगभग 55% कच्चा तेल मध्य पूर्व से आता है, जिसमें होर्मुज का रास्ता बेहद अहम है:

-Gulf में काम करने वाले भारतीयों की प्रेषण प्रभावित

-ट्रांसपोर्ट महंगा होने से हर चीज की कीमत बढ़ने का खतरा

-फर्टिलाइजर महंगे होने से खेती और खाद्य महंगाई पर असर

-तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत में पड़ सकती है महंगाई की मार

सबसे ज्यादा किन देशों पर?

-अफ्रीका और एशिया के गरीब देश

-छोटे द्वीपीय राष्ट्र -ऊर्जा आयात पर निर्भर देश

-सप्लाई चेन पर असर

-सैकड़ों तेल टैंकर रास्ते में फंसे -शिपिंग इंश्योरेंस महंगा

-ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित -इससे रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो रही

 Written By: Geeta Sharma