आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए OpenAI ने एक नया बाउंटी प्रोग्राम शुरू किया है। इस प्रोग्राम के तहत अगर कोई रिसर्चर कंपनी के AI मॉडल में मौजूद बायोसेफ्टी सुरक्षा को चकमा देने वाली कमजोरी खोज लेता है, तो उसे 50 हजार डॉलर तक का इनाम मिल सकता है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 47 लाख रुपये के आसपास बैठती है। OpenAI पहले भी इस तरह के सिक्योरिटी चैलेंज आयोजित करती रही है। कंपनी का उद्देश्य AI सिस्टम में मौजूद संभावित जोखिमों को सामने लाना है, ताकि उन्हें समय रहते ठीक किया जा सके और तकनीक का गलत इस्तेमाल रोका जा सके।
क्या है OpenAI Bio Bounty Program?
OpenAI का बायो बाउंटी प्रोग्राम AI मॉडल की सुरक्षा जांचने के लिए बनाया गया है। इसके जरिए सुरक्षा विशेषज्ञ और रिसर्चर यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि क्या कोई व्यक्ति मॉडल के बायोलॉजिकल सेफ्टी नियमों को तोड़ सकता है या नहीं। कंपनी का कहना है कि अगर किसी मॉडल में ऐसी कमजोरी रह जाती है, तो उसका फायदा गलत लोग उठा सकते हैं। इसलिए पहले से इन खामियों को पहचानना और उन्हें सुधारना जरूरी है। इस कार्यक्रम में नए AI मॉडल को भी शामिल किया गया है। जहां पुराने मॉडल के लिए अधिकतम इनाम 25 हजार डॉलर था, वहीं नए मॉडल से जुड़ी गंभीर सुरक्षा खामी खोजने पर यह राशि बढ़ाकर 50 हजार डॉलर कर दी गई है।
कौन ले सकता है हिस्सा और कैसे करें आवेदन?
जो लोग इस चुनौती में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें OpenAI के बाउंटी प्रोग्राम के लिए आवेदन करना होगा। इसके लिए OpenAI Bio Bug Bounty से जुड़ी आधिकारिक जानकारी खोजकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। भाग लेने के लिए ChatGPT अकाउंट की जरूरत होगी। आवेदन स्वीकार होने के बाद रिसर्चर तय नियमों के अनुसार मॉडल की सुरक्षा जांच कर सकते हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके अन्य प्रोडक्ट्स में सुरक्षा संबंधी गंभीर कमियां खोजने वाले रिसर्चर्स को भी इनाम दिया जा सकता है। रिवॉर्ड की राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि खोजी गई समस्या कितनी गंभीर है और उसका संभावित प्रभाव कितना बड़ा है।
बड़ी टेक कंपनियां भी चलाती हैं बाउंटी प्रोग्राम
सिर्फ OpenAI ही नहीं, बल्कि दुनिया की कई बड़ी टेक कंपनियां अपने सिस्टम की सुरक्षा बढ़ाने के लिए बग बाउंटी प्रोग्राम चलाती हैं। इनका मकसद बाहरी सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से कमजोरियों को ढूंढना और उन्हें ठीक करना होता है। कई बड़ी कंपनियां, जैसे Meta और Apple, भी ऐसे कार्यक्रमों के जरिए सिक्योरिटी रिसर्चर्स को उनकी खोज के लिए लाखों रुपये तक के पुरस्कार देती हैं।
Written By Toshi Shah