देशभर में पहले से ज्यादा महंगाई दर बढ़ गया है। जिसका असर रोजमर्रा की चीजों पर पड़ रहा है। इसी कड़ी में आप सबकी पसंदीदा मैगी पर भी महंगाई की मार पड़ी है। कंपनी ने कीमत नहीं बढ़ाई, बल्कि इसके साइज में कटौती कर दी है। जिसकी वजह से अब 12 रुपये की मैगी जिससे पेट भर जाया करता था, अब पेट नहीं भर पाएगी।
'श्रिंकफ्लेशन' का क्या मतलब होता है?
देशभर में लोकप्रिय इंस्टेंट नूडल्स ब्रांड मैगी के उपभोक्ताओं के लिए एक अहम बदलाव सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेस्ले इंडिया ने मैगी के कई पैकेटों का वजन कम कर दिया है, जबकि उनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस कदम को बाजार में श्रिंकफ्लेशन का उदाहरण माना जा रहा है। जिसमें उत्पाद की कीमत समान रहती है, लेकिन उसकी मात्रा घटा दी जाती है।
दाम वही, लेकिन वजन में की गई कटौती
रिपोर्ट के मुताबिक, 7 रुपये वाले मैगी पैकेट का वजन 35 ग्राम से घटाकर 32 ग्राम कर दिया गया है। इसी तरह 12 रुपये वाले पैकेट का वजन 52 ग्राम से कम करके 48 ग्राम कर दिया गया है। इसके अलावा 15, 30, 60, 90 और 120 रुपये वाले पैकेटों का वजन भी लगभग 7 प्रतिशत तक कम किया गया है। यानी अब ग्राहकों को पहले की तुलना में कम मात्रा में मैगी मिलेगी, जबकि कीमत पहले जैसी ही रहेगी।
उपभोक्ताओं पर पड़ेगा बदलाव का सीधा असर
इस बदलाव का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। जो लोग कम कीमत में भरपेट मैगी का आनंद लेते थे, उन्हें अब उसी कीमत पर कम मात्रा मिलेगी। हालांकि कीमत न बढ़ने से पहली नजर में उपभोक्ताओं को कोई अंतर महसूस नहीं होगा, लेकिन पैकेट के वजन में कमी उनकी खरीदारी के मूल्य को प्रभावित करेगी।
बढ़ती उत्पादन लागत के वजह से लिया गया फैसला
कंपनी का कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत और कच्चे माल की कीमतों से निपटने के लिए उसने पहले लागत कम करने के कई उपाय किए। इनमें उत्पादन में बचत, बेहतर खरीद प्रक्रिया और क्षमता बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। कंपनी के अनुसार, कीमत बढ़ाना उसका अंतिम विकल्प होता है। इसलिए इस बार कीमत बढ़ाने के बजाय पैकेट का वजन कम करने का फैसला लिया गया।
शेयर बाजार में दिखा असर
इस खबर का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। नेस्ले इंडिया के शेयरों में करीब 1.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और कारोबार के अंत में कंपनी का शेयर 1,405.20 रुपये पर बंद हुआ। कुल मिलाकर, यह फैसला कंपनी के लिए लागत प्रबंधन का तरीका हो सकता है, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए यह कम मात्रा में उत्पाद मिलने का संकेत है।
Written By: Geeta Sharma