गो प्रतिष्ठा को धर्मयुद्ध का आह्वान बताते हुए अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने घोषणा की कि धर्म की रक्षा के लिए शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सेना संत समाज में फैल रही अशास्त्रीयता और अधर्म को समाप्त करने का काम करेगी। साथ ही उनका कहना था कि धार्मिक समाज में धर्मनिरपेक्ष शपथ नहीं, बल्कि धर्म की शपथ ही मान्य होनी चाहिए, और यदि परिस्थितियाँ बनीं तो शस्त्र उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

अखाड़ों के समर्थन न मिलने पर अलग सेना बनाने का ऐलान

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार को कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल में आयोजित कार्यक्रम में देशभर से आए संतों, धर्माचार्यों और गो रक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि साधु समाज में भी विकृतियाँ बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के कई महंतों और साधुओं ने कहा कि वे मुख्यमंत्री के साथ हैं, शंकराचार्य के साथ नहीं। इस पर उन्होंने कहा कि जब अखाड़े उनके साथ नहीं हैं, तो अब वे अपनी अलग सेना बनाएंगे।

गोरखपुर से शुरू होगी गविष्ठि यात्रा

आपको बता दें की अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि समग्र गविष्ठि गोयुद्ध यात्रा 3 मई से 23 जुलाई तक निकाली जाएगी। इस यात्रा की शुरुआत गोरखपुर से होगी और वहीं इसका समापन भी होगा। इसके बाद 24 जुलाई को कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर एक बड़ी सभा आयोजित की जाएगी।

सनातन की 'सुप्रीम कोर्ट' हैं शंकराचार्य

शंकराचार्य ने यह भी कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है और वे ही इसकी 'सुप्रीम कोर्ट' हैं। उन्होंने कहा कि गो माता की रक्षा के साथ-साथ सनातन धर्म की रक्षा का भी संकल्प लेना होगा।

Written By - Namita Verma