मिडिल ईस्ट में जंग अभी जारी है। इस युध्द की शुरुआत से ही अमेरिका अपनी जीत का दावा करता आ रहा है। यहां तक कि ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद यह भी कहा गया कि अब ईरान के पास सरेंडर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हालांकि जमीनी हालात कुछ और ही संकेत दे रहे हैं।
ट्रंप ने किया बड़ा ऐलान
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल के टैंकरों से सीमित मात्रा में तेल खरीदने की अस्थायी मंजूरी दे दी है। इससे पहले तक ट्रंप प्रशासन रूस से तेल खरीदने वाले देशों को सख्त चेतावनी देता रहा था।
कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार
वहीं ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतें 4 साल में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द काबू में नहीं आए तो यह पूरी दुनिया के लिए बड़ा आर्थिक संकट बन सकता है। ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने की अनुमति केवल समुद्र में पहले से फंसे टैंकरों तक सीमित है और यह एक शॉर्ट-टर्म फैसला है।
पुतिन को जंग से दूर रखने की कोशिश?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला रणनीतिक मजबूरी का परिणाम हो सकता है। माना जा रहा है कि अमेरिका हर हाल में रूस को इस युद्ध से दूर रखना चाहता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही इस संघर्ष को खत्म करने की अपील कर चुके हैं और ईरानी नेताओं से बातचीत भी कर चुके हैं। हालांकि रूस से तेल खरीदने की अनुमति एक तरह से कूटनीतिक संकेत हो सकती है ताकि रूस सीधे तौर पर ईरान के समर्थन में युद्ध में शामिल न हो। दूसरी तरफ अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए लिया गया है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह युद्ध किस दिशा में जाता है और अमेरिका की अगली रणनीति क्या होगी।
Writen By: Geeta Sharma