सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में तेज़ी देखने को मिली। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा,जिससे कीमती धातुओं की मांग में सुधार हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों ने बाजार की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई है।
इंटरनेशनल मार्केट में बढ़ी गोल्ड की कीमत
इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड करीब 1 फीसदी से अधिक बढ़कर लगभग 4,565 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, स्पॉट सिल्वर में 3 फीसदी से ज्यादा की मजबूती दर्ज की गई और यह लगभग 78 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करती दिखाई दी। डॉलर इंडेक्स में लगातार गिरावट से भी सोने को सहारा मिला, क्योंकि कमजोर डॉलर के कारण सोना विदेशी निवेशकों के लिए सस्ता हो जाता है और उसकी मांग बढ़ती है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना लगभग स्थिर
घरेलू बाजार की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जून डिलीवरी वाला सोना लगभग स्थिर रहा और आखिरी बार 1,59,325 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। दूसरी ओर, चांदी के सबसे सक्रिय वायदा अनुबंध में 1.7 फीसदी की तेजी आई और इसकी कीमत 2,76,500 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। भारतीय बाजार में कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों का अनुसरण करती हैं।
महंगाई को लेकर बाजार की चिंता घटी
तेल की कीमतों में नरमी भी सोने के लिए सकारात्मक साबित हुई। हाल ही में तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है और होर्मुज स्ट्रेट जल्द दोबारा खुल सकता है। इससे वैश्विक सप्लाई बाधित होने की आशंकाएं कम हुईं और महंगाई को लेकर बाजार की चिंता भी घटी।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा बढ़ सकता है ब्याज दरें
इस बीच, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना भी बढ़ गई है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी GDP आंकड़ों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात पर बनी हुई है।
Written By: Geeta Sharma