केंद्र सरकार के हालिया फैसले से आने वाले समय में स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड खरीदने वाले ग्राहकों को राहत मिल सकती है। सरकार ने इन इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कुछ महत्वपूर्ण कच्चे माल पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) समाप्त कर दी है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, उत्पादन लागत घटाना और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।

अब नहीं लगेगे बेसिक कस्टम ड्यूटी

सरकार के अनुसार, डिस्प्ले असेंबली, लिथियम-आयन सेल, इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल और अन्य आवश्यक कंपोनेंट्स के निर्माण में उपयोग होने वाले कई इनपुट्स पर अब बेसिक कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी। यह रियायत 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रहेगी। इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को गति मिलने के साथ-साथ आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।

चीन और वियतनाम जैसे देशों पर काफी हद है निर्भर

भारत अभी भी डिस्प्ले और बैटरी से जुड़े कई अहम कंपोनेंट्स के लिए चीन और वियतनाम जैसे देशों पर काफी हद तक निर्भर है। सरकार का मानना है कि शुल्क में राहत मिलने से स्थानीय उत्पादन बढ़ेगा, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और धीरे-धीरे विदेशी निर्भरता कम होगी।

कस्टम ड्यूटी हटने से घटेगी मैन्युफैक्चरिंग लागत

इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कुल उत्पादन लागत में डिस्प्ले और लिथियम-आयन बैटरी जैसे कंपोनेंट्स का बड़ा योगदान होता है। पहले इन पर 5 से 7.5 प्रतिशत तक बेसिक कस्टम ड्यूटी लागू थी, जिससे निर्माण लागत बढ़ जाती थी। अब यह शुल्क हटने के बाद कंपनियों की लागत कम होगी। यदि निर्माता इस बचत का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं, तो भारत में निर्मित स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और अन्य गैजेट्स की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।

AI के वजह से महंगे हुए इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स

पिछले कुछ समय से वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की उपलब्धता प्रभावित हुई है। सीमित सप्लाई और बढ़ती मांग के चलते इन कंपोनेंट्स की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई, जिसका असर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की निर्माण लागत पर भी पड़ा। इसी वजह से कई प्रमुख कंपनियों ने अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य डिवाइसों की कीमतों में इजाफा किया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए राहत

ऐसे में सरकार का यह फैसला भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए राहत भरा माना जा रहा है। यदि कंपनियां कम हुई उत्पादन लागत का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो आने वाले महीनों में भारत में बने इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद पहले की तुलना में अधिक किफायती हो सकते हैं।

 

 

Written By Toshi Shah