देसी FMCG कंपनी Dabur India ने संकेत दिया है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में वह एक और कीमत वृद्धि कर सकती है। कंपनी पहले ही मौजूदा तिमाही में लगभग 4 फीसदी तक दाम बढ़ा चुकी है। डाबर के ग्लोबल CEO मोहित मल्होत्रा के अनुसार, पैकेजिंग सामग्री और अन्य इनपुट लागतों में लगातार बढ़ोतरी इसके पीछे मुख्य वजह है। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने FMCG कंपनियों की लागत बढ़ा दी है।
डाबर ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में की बढ़ोतरी दर्ज
डाबर ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में अपने कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 15.75 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की। यह सुधार मुख्य रूप से ग्रामीण और शहरी बाजारों में बेहतर मांग तथा वॉल्यूम ग्रोथ की वजह से आया। हालांकि,बढ़ती महंगाई और पैकेजिंग लागत ने कंपनियों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
FMCG जैसी कंपनियों पर लागत का दबाव
महंगाई का दबाव केवल डाबर तक सीमित नहीं है। देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी Hindustan Unilever (HUL), Nestlé India, Marico, Britannia Industries और ITC जैसी कंपनियां भी बढ़ती कमोडिटी और पैकेजिंग लागत से जूझ रही हैं। चौथी तिमाही में इन कंपनियों ने मांग में सुधार जरूर दर्ज किया, लेकिन साथ ही संकेत दिया कि आने वाले महीनों में लागत का दबाव और बढ़ सकता है।
प्रीमियम और डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स पर फोकस
FMCG कंपनियां अब अपने मार्जिन बचाने के लिए कई रणनीतियों पर काम कर रही हैं। इनमें उत्पादों की कीमतें बढ़ाना,पैकेजिंग का आकार छोटा करना और प्रीमियम उत्पादों पर ज्यादा ध्यान देना शामिल है। Marico और Nestlé India जैसी कंपनियां पहले से ही प्रीमियम और डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड्स पर जोर बढ़ा रही हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ती तनाव से महंगाई की आशंका
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz में अनिश्चितता कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकती है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग और मैन्युफैक्चरिंग लागत पर पड़ता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सरकार को पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं, जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं और महंगी हो सकती हैं।
Written By: Geeta Sharma