छठ पूजा 2026 की शुरुआत आज खरना के साथ होगी। यह पर्व खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। आज के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को खरना यानी प्रसाद ग्रहण करके उपवास तोड़ते हैं। इस दिन विशेष तौर पर गुड़, रोटी और फल का प्रसाद तैयार किया जाता है।

निर्जला उपवास का महत्व
छठ पूजा का सबसे खास हिस्सा है 36 घंटे का निर्जला उपवास, जिसमें व्रती पानी और भोजन से दूर रहते हैं। यह उपवास सूर्य देव और छठी माता की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। व्रती इस समय पूरी तरह से संयमित रहते हैं और पूजा-संस्कार के नियमों का पालन करते हैं।

सूर्य को अर्घ्य देने का समय
छठ पूजा का दूसरा दिन यानी संध्या अर्घ्य कल मनाया जाएगा। इस दिन व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। नदी, तालाब या किसी जलाशय के किनारे यह पूजा संपन्न की जाती है। व्रती साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हुए जल के पास सजावट करके सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

शुरू हुई पूजा और प्रसाद की तैयारी
छठ पर्व के दौरान व्रती दिनभर घर और पूजा स्थल की सफाई करते हैं। खासकर भोजन और प्रसाद की तैयारी बेहद साफ-सुथरी और पवित्र तरीके से होती है। गुड़, रोटी, फल और ठेकुआ जैसी पारंपरिक चीजें प्रसाद में शामिल होती हैं। परिवार के सभी सदस्य इस पर्व में व्रतियों का सहयोग करते हैं।

छठ पूजा का सांस्कृतिक महत्व
छठ पूजा न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी बहुत बड़ा पर्व है। यह उत्सव प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर देता है। व्रतियों की भक्ति और मेहनत से यह पर्व हर साल श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

Written by: Anushka sagar