नई दिल्ली, -
भाजपा हरियाणा प्रभारी एवं भाजपा राजस्थान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने संसद के उच्च सदन
राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लीl

राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने पर
डॉ. सतीश पूनियां ने कहा कि,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा
शीर्ष संगठन नेतृत्व के स्नेहाशीष से विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के उच्च सदन की सदस्यता की शपथ लेकर आज रोमांचित हूँ। कदाचित यह रोमांच वैसा ही है, जैसे गाँव में खेलते हुए आसमान में उड़ते जहाज़ को कौतूहल से देखकर उसमें बैठने का दिवा-स्वप्न देखना; गाँव से अजनबी शहर में पढ़ाई के लिए आना; उसी वर्ष बड़े भाई का काल-कवलित होना; पढ़ाई के साथ-साथ राष्ट्रवादी संगठन से जुड़ना और उस दौर में श्रीराम जन्मभूमि, कश्मीर एवं बोफोर्स जैसे बड़े आंदोलनों में दमन का शिकार होना; और इसी दौरान पिताजी का दारुण निधन, फिर भी छात्र राजनीति, युवा राजनीति और आज की राजनीति के संघर्ष एवं द्वंद्व के बीच बिना थके, बिना रुके, साधना की तरह निरंतरता के साथ कर्तव्य-पथ पर अडिग चलते रहना, हर हाल में बने रहना—'संगठन सर्वोपरि' के ध्येयवाद ने संघर्षों के बीच बहुत काम दिया, मान दिया।

इन सबके बीच माँ का अटूट आशीर्वाद तो था ही, लेकिन संगठन रूपी मातृछाया ने निरंतर पल्लवित किया। आज जो कुछ भी हूँ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता पार्टी के संगठन की शक्ति ने ही एक सोपान प्रदान किया है; कैसे भूलूँ उनको, जो हर प्रतिकूलता में साये की तरह साथ खड़े रहे—मित्र, कार्यकर्ता, परिवारजन एवं शुभचिंतक; उन सबके भरोसे और अनुपम स्नेह के समक्ष नतमस्तक हूँ, इन सबका उऋण होने लिए जाने कितने जन्म लेने होंगे।

समाज किसी व्यक्ति को अपेक्षाओं से परखता है; शत-प्रतिशत तो नहीं, लेकिन 'सौ में सौ' होने के भाव से मैंने सदा-सर्वदा स्वयं को संगठन और विचार-साधना में, अंत्योदय के प्रण के साथ, प्रतिबद्ध रखा है। आज उच्च सदन का सदस्य बनने के नाते उन अपेक्षाओं के निकट पहुँचने का स्वयं से संकल्प लेता हूँ।

राजस्थान के अर्ध मरूस्थल बेवड़ गांव की पैदाइश से लेकर उच्च सदन तक पहुँचना दिवा स्वप्न हो सकता है

Written by-एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती