चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाने वाली अनंग त्रयोदशी इस साल 2026 में खास धार्मिक महत्व लेकर आई है। इस दिन भगवान शिव के साथ कामदेव और रति की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यह व्रत सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में प्रेम, आकर्षण और रिश्तों की मिठास बढ़ाने का भी प्रतीक है। खासकर शादीशुदा लोगों और प्रेम संबंधों के लिए यह दिन बेहद अहम माना जाता है।

क्या है अनंग त्रयोदशी
अनंग शब्द का अर्थ होता है ‘बिना शरीर के’। पौराणिक कथा के अनुसार जब कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने की कोशिश की, तो शिव जी ने क्रोधित होकर उन्हें भस्म कर दिया। इसके बाद वे शरीरहीन हो गए और उन्हें ‘अनंग’ कहा जाने लगा। बाद में रति की प्रार्थना पर शिव जी ने उन्हें फिर से जीवन दिया, लेकिन शरीर के बिना। इसी घटना से इस व्रत का नाम अनंग त्रयोदशी पड़ा।

क्यों की जाती है विशेष पूजा
अनंग त्रयोदशी के दिन भगवान शिव के साथ कामदेव और रति की पूजा करने का खास महत्व है। यह पूजा प्रेम और वैवाहिक जीवन में संतुलन बनाए रखने का प्रतीक मानी जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग अपने रिश्तों में दूरी या तनाव महसूस कर रहे होते हैं, उनके लिए यह दिन सकारात्मक बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है।

पूजा करने का लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। पति-पत्नी के बीच आपसी समझ और प्रेम मजबूत होता है। इसके अलावा जिन लोगों के विवाह में बाधाएं आ रही होती हैं या प्रेम संबंधों में दिक्कतें होती हैं, उन्हें भी इस व्रत से लाभ मिलने की बात कही जाती है। साथ ही मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है।

कैसे करें पूजा
इस दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है और शाम के समय भगवान शिव की पूजा की जाती है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित किए जाते हैं। साथ ही कामदेव और रति का ध्यान करते हुए सुखी जीवन की कामना की जाती है। पूजा के अंत में दीपक जलाकर और मंत्रों का जाप करके व्रत पूरा किया जाता है।

 

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Written by: Anushka sagar