Hindi News: क्या इंसानों के लिए समय को रोकना कभी संभव हो सकता है? अब तक यह सब हमें सिर्फ हॉलीवुड फिल्मों में ही देखने को मिलता था। जहां लोगों को दशकों तक बर्फ में जमा कर रखा जाता है और फिर उन्हें दोबारा जिंदा कर दिया जाता है। लेकिन अब विज्ञान ने इस कल्पना को हकीकत के करीब ला दिया है।
जर्मनी के वैज्ञानिकों ने कर दिखाया कमाल
जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ एर्लांगेन-नूर्नबर्ग के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रयोग किया है जिसने विज्ञान की दुनिया में हलचल मचा दी है। शोधकर्ताओं ने चूहे के दिमाग के टिशूओं को -196 डिग्री सेल्सियस के बेहद कम तापमान पर फ्रीज करने के बाद सफलतापूर्वक फिर से सक्रिय कर दिया। यह तापमान लिक्विड नाइट्रोजन की मदद से हासिल किया गया।
क्या होता है 'विट्रिफिकेशन' तकनीक?
आमतौर पर जब किसी जैविक टिशू को जमाया जाता है तो बर्फ के नुकीले क्रिस्टल कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा देते हैं। इससे कोशिकाएं फट जाती हैं और टिशू नष्ट हो जाते हैं। इस समस्या से बचने के लिए वैज्ञानिकों ने 'विट्रिफिकेशन' नामक तकनीक का उपयोग किया। इस प्रक्रिया में ऊतकों को इतनी तेजी से ठंडा किया जाता है कि उनमें बर्फ बनने के बजाय कांच जैसी अवस्था बन जाती है, जिससे कोशिकाएं सुरक्षित रहती हैं।
शोध में मिले चौंकाने वाले परिणाम
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने चूहे के दिमाग के छोटे हिस्सों को सात दिनों तक -196 डिग्री तापमान पर सुरक्षित रखा। इसके बाद उन्हें एक विशेष गर्म घोल में धीरे-धीरे पिघलाया गया। हैरानी की बात यह रही कि जांच में पाया गया कि न्यूरॉन्स पूरी तरह सुरक्षित थे। न केवल कोशिकाएं सुरक्षित थीं बल्कि उनके बीच के संपर्क यानी न्यूरल कनेक्शन भी बरकरार रहे। और भी चौंकाने वाली बात यह थी कि पिघलने के बाद इन कोशिकाओं ने दोबारा ऊर्जा बनाना शुरू कर दिया। जिस हिस्से का परीक्षण किया गया वह दिमाग का वह भाग है जो याददाश्त और नई चीजें सीखने की क्षमता से जुड़ा होता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि पिघलने के बाद भी यह हिस्सा इलेक्ट्रिक सिग्नल्स पर प्रतिक्रिया देने लगा।
चिकित्सा विज्ञान में क्रांति लाएगी ये शोध
हालांकि यह शोध अभी शुरुआती चरण में है और केवल दिमाग के छोटे हिस्सों पर ही किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे मानव शरीर को इस तरह सुरक्षित रखना अभी बहुत दूर की बात है। फिर भी यह खोज भविष्य में गंभीर बीमारियों के इलाज, अंग प्रत्यारोपण और ऑर्गन बैंक बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह तकनीक आने वाले समय में चिकित्सा विज्ञान में क्रांति ला सकती है और शायद वह दिन भी आए जब जीवन को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव हो सके।
Writen By: Geeta Sharma