भारत में रोज़ाना लाखों वाहन सड़कों पर चलते हैं। इन वाहनों की वजह से लोगों का सफर आसान हो जाता है और देश की आर्थिक गतिविधियां भी तेज़ी से आगे बढ़ती हैं। हालांकि, इसके साथ सड़क हादसों का खतरा भी हमेशा बना रहता है। ऐसी स्थिति में वाहन का बीमा करवाना बहुत जरूरी माना जाता है। खासतौर पर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस, जो कानून के अनुसार हर वाहन के लिए अनिवार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि यदि किसी दुर्घटना में किसी व्यक्ति को नुकसान होता है तो उसे आर्थिक सहायता मिल सके।

संसद में सरकार द्वारा दी गई जानकारी

बता दें कि भारत में बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों का बीमा नहीं करवाते। हाल ही में संसद में सरकार द्वारा दी गई जानकारी से यह समस्या काफी गंभीर नजर आई है। आइए जानते हैं कि देश में कितने प्रतिशत वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं और इसके क्या नुकसान हो सकते हैं।

बिना बीमा के कितने प्रतिशत वाहन चल रहे हैं

सरकार के अनुसार भारत की सड़कों पर चलने वाले करीब 44 प्रतिशत वाहनों के पास बीमा नहीं है। यानी लगभग हर दो में से एक वाहन बिना इंश्योरेंस के सड़क पर चल रहा है। यह स्थिति न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि दुर्घटना होने पर पीड़ित लोगों के लिए मुश्किलें भी पैदा कर सकती है।

यह जानकारी राज्यसभा में दी गई थी। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने बताया कि यह आंकड़ा सरकार के VAHAN डेटाबेस के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें 6 मार्च 2026 तक उन सभी वाहनों को शामिल किया गया है जिनका रजिस्ट्रेशन और फिटनेस वैध है।

थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस क्यों जरूरी

मोटर वाहन कानून के मुताबिक हर वाहन के लिए थर्ड-पार्टी बीमा होना अनिवार्य है। यदि किसी वाहन से दुर्घटना हो जाती है और किसी व्यक्ति को चोट लगती है या उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो बीमा कंपनी पीड़ित को मुआवजा देती है। इससे इलाज और अन्य खर्चों में मदद मिलती है और वाहन मालिक पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ता है।

मुआवजा देने के लिए दो तरह की व्यवस्था

सरकार के अनुसार केंद्रीय मोटर वाहन (मोटर वाहन दुर्घटना कोष) नियम, 2022 लागू किए गए हैं, जिनमें जनवरी 2026 में कुछ बदलाव भी किए गए। इन नियमों के तहत दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए दो प्रकार की व्यवस्थाएं बनाई गई हैं।

बिना बीमा और हिट-एंड-रन मामलों के लिए फंड
यह फंड उन मामलों में इस्तेमाल होता है जहां दुर्घटना करने वाले वाहन का बीमा नहीं होता या चालक टक्कर मारकर फरार हो जाता है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य घायल लोगों के इलाज के खर्च को पूरा करना है।

सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए सरकारी राहत योजना
सरकार ने सड़क हादसों के पीड़ितों की मदद के लिए एक राहत योजना भी शुरू की है। इसके तहत दुर्घटना के बाद पहले 7 दिनों तक सरकार द्वारा तय अस्पतालों में लगभग 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पैसों की कमी के कारण इलाज में देरी न हो।

बिना बीमा वाहन चलाने के नुकसान

बिना इंश्योरेंस वाहन चलाना कई समस्याएं पैदा कर सकता है।

कानूनी कार्रवाई 

बिना बीमा वाहन चलाना कानून के खिलाफ है। पकड़े जाने पर जुर्माना या अन्य दंड मिल सकता है।

दुर्घटना में भारी खर्च 

अगर हादसा हो जाता है तो इलाज और नुकसान की पूरी रकम वाहन मालिक को खुद देनी पड़ सकती है।

मुआवजा देने की जिम्मेदारी 

यदि किसी अन्य व्यक्ति को चोट लगती है या उसकी संपत्ति को नुकसान होता है, तो उसका मुआवजा भी वाहन मालिक को देना पड़ सकता है।

आर्थिक जोखिम 

कई बार दुर्घटना का खर्च लाखों रुपये तक पहुंच जाता है, जिससे वाहन मालिक को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।

 

Written By Toshi Shah