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सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है नकली हल्दी, जानें पहचानने के आसान तरीके
विशेषज्ञों का मानना है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले मसालों की शुद्धता सीधे सेहत से जुड़ी होती है। इसलिए हल्दी जैसी सामान्य दिखने वाली चीज में भी मिलावट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका असर लंबे समय में स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
हाल ही में सामने आए कुछ मामलों में यह दावा किया गया कि शादी के दौरान हल्दी लगाने के बाद दूल्हा-दुल्हन को अस्पताल जाना पड़ा। इसके बाद हल्दी की शुद्धता और उसकी मिलावट को लेकर सवाल फिर से चर्चा में आ गए हैं। वैसे हल्दी भारतीय रसोई का बेहद अहम हिस्सा है। यह सिर्फ स्वाद और रंग ही नहीं देती, बल्कि आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है, लेकिन बाजार में मिलने वाली हर हल्दी शुद्ध हो, यह जरूरी नहीं। आज के समय में बढ़ती मिलावट एक बड़ी समस्या बन चुकी है। कई बार हल्दी में ऐसे कृत्रिम रंग और रसायन मिला दिए जाते हैं जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। यही वजह है कि हल्दी खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
हल्दी में किस तरह की मिलावट होती है?
कई मामलों में हल्दी को ज्यादा चमकदार पीला रंग देने या उसका वजन बढ़ाने के लिए मिलावट की जाती है। इसमें मेटानिल येलो जैसे सिंथेटिक रंग, लेड क्रोमेट जैसे हानिकारक रसायन या फिर चॉक पाउडर तक मिलाया जा सकता है। कुछ जगहों पर कम गुणवत्ता वाली हल्दी या अन्य सस्ते पदार्थ भी मिला दिए जाते हैं, जिससे असली और नकली पहचानना मुश्किल हो जाता है।
घर पर हल्दी की शुद्धता कैसे जांचें?
हल्दी असली है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए कुछ आसान घरेलू तरीके बताए जाते हैं। एक तरीका पानी वाला टेस्ट है। इसके तहत गुनगुने पानी में हल्दी डालकर कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाता है। अगर हल्दी नीचे बैठ जाए और पानी हल्का पीला रहे, तो इसे अपेक्षाकृत शुद्ध माना जाता है। लेकिन अगर हल्दी तेजी से घुलने लगे और पानी का रंग गहरा पीला हो जाए, तो मिलावट की आशंका हो सकती है। एक और तरीका हथेली टेस्ट माना जाता है। इसमें हल्दी की एक चुटकी हथेली पर रखकर उसे रगड़ा जाता है। असली हल्दी आमतौर पर हल्का पीला दाग छोड़ती है, जबकि मिलावटी हल्दी का रंग अलग या अस्थिर हो सकता है।
मिलावटी हल्दी से क्या नुकसान हो सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, हल्दी में मिलाए गए कुछ रसायन स्वास्थ्य के लिए गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। उदाहरण के लिए, मेटानिल येलो जैसी मिलावट शरीर में जाने पर पेट दर्द, मतली, अपच और फूड प्वाइजनिंग जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है। कुछ प्रयोगों में यह भी बताया जाता है कि संदिग्ध मिलावट की जांच के लिए रासायनिक परीक्षण किए जाते हैं, जिनसे हानिकारक रंगों की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है। हालांकि ऐसे परीक्षण आम लोगों के लिए घर पर करना सुरक्षित नहीं होता, इसलिए सावधानी बरतना ही बेहतर है।
हल्दी खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
हल्दी खरीदते समय हमेशा भरोसेमंद ब्रांड या विश्वसनीय स्रोत को चुनना चाहिए। बहुत ज्यादा चमकीले रंग या असामान्य रूप से सस्ती हल्दी से बचना बेहतर माना जाता है। पैक्ड मसालों पर FSSAI जैसे मानकों की जांच करना भी मददगार हो सकता है।
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