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सुप्रीम कोर्ट ने स्ट्रे डॉग्स पर सख्त रुख रखा कायम, कहा- जन सुरक्षा सर्वोपरि
सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स और NGOs द्वारा दायर उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिसमें कुत्तों को हटाने के निर्देश को वापस लेने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी अपने पहले के आदेश में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने डॉग लवर्स द्वारा दायर उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों जैसी जगहों से कुत्तों को हटाने के निर्देश वापस लेने या उनमें संशोधन की मांग की गई थी। इसके साथ ही कोर्ट का पुराना आदेश यथावत बना रहेगा।
SOP के खिलाफ दाखिल सभी आवेदन अस्वीकार-SC
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनिमल वेलफेयर बोर्ड द्वारा जारी SOP के खिलाफ दाखिल सभी आवेदन अस्वीकार किए जाते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि संस्थागत और सार्वजनिक क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता देना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी माना कि यदि राज्यों ने Animal Birth Control (ABC) नियमों को सही तरीके से लागू किया होता, तो हालात इतने गंभीर नहीं बनते।
डॉग बाइट के कई मामले दर्ज
अदालत ने देशभर में बढ़ती डॉग बाइट घटनाओं पर चिंता जताई। कोर्ट के अनुसार राजस्थान के श्रीगंगानगर, सीकर, उदयपुर और भीलवाड़ा समेत कई जिलों से चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों में भी बड़ी संख्या में लोग कुत्तों के हमलों का शिकार हुए हैं। दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर जनवरी से अब तक 31 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए, जिनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में रेबीज से मौतों की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।
तमिलनाडु में चार महीनों में दो लाख डॉग बाइट मामले दर्ज
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि 7 नवंबर 2025 को दिए गए निर्देशों का कई राज्यों ने ठीक तरह से पालन नहीं किया। कोर्ट ने उदाहरण देते हुए बताया कि राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने के भीतर 1084 लोगों को कुत्तों ने काटा, जिनमें छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं। वहीं तमिलनाडु में पिछले चार महीनों में करीब दो लाख डॉग बाइट मामले दर्ज हुए। अदालत ने कहा कि देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों और शहरी इलाकों में ऐसी घटनाएं प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दी चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि राज्यों ने आदेशों का पालन नहीं किया, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को उचित प्रशिक्षण देने, एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराने और सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए। साथ ही NHAI को हाईवे से आवारा मवेशियों को हटाने तथा उनके लिए गौशालाओं की व्यवस्था करने को कहा गया।
कोर्ट ने कही ये बात
कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की समस्या अत्यधिक बढ़ चुकी है, वहां विशेषज्ञों की मदद से स्थिति पर नियंत्रण किया जाए। गंभीर रूप से संक्रमित और ऐसे खतरनाक कुत्ते जिनका इलाज संभव नहीं है तथा जो समाज के लिए खतरा बन चुके हैं, उन्हें कानून के अनुसार यूथेनेशिया देने पर भी विचार किया जा सकता है।
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