चुनाव आयोग की तरफ से SIR को लेकर लगातार हो रहे विवाद की बीच फ़ॉर्म 6 को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। डिक्लेरेशन फ़ॉर्म एक अतिरिक्त दस्तावेज़ था जिसे उन राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में मांगा गया था। जहां पर 24 जून 2025 के SIR आदेश और उसके बाद के SIR आदेशों के मुताबिक SIR प्रक्रिया की गई। यह सभी आयोग के सर्वसम्मत फ़ैसले के मुताबिक हुआ था। आयोग द्वारा 26 सितंबर 2026 को जारी किए गए प्रेस नोट में उन सभी राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों के लिए जहां SIR पूरा हो चुका है और जहां यह अभी शुरू होना है, डिक्लेरेशन फ़ॉर्म की कोई ज़रूरत नहीं होगी।
पहली बार बने मतदाताओं को बड़ी राहत
जिन राज्यों में नए मतदाता बनने के लिए फॉर्म-6 के साथ-साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र अर्थात ANNEXURE-D को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है। चुनाव आयोग ने इस घोषणा पत्र को अनिवार्य नहीं माना है। चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि जहां पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहां चुनाव आयोग ने इसे ऑनलाइन फॉर्म-6 से हटा दिया है। ऐसे में पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
कहां होगी बदलाव
निर्वाचन आयोग अधिकारी द्वारा यह भी साफ कर दिया है। कि फॉर्म-6 के मूल प्रारुप में किसी तरह का कानूनी बदलाव नहीं किया गया। क्योंकि विवाद को देखते हुए आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र अनिवार्य तौर पर शामिल किया है। आज आनी की बुधवार को चुनाव आयोग उन राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म-6 से अतिरिक्त घोषणा पत्र को हटाकर पुराने पेटर्न को बहाल करने का ऐलान कर चुका है। इसके दायरे में वह क्षेत्र भी है जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो गई है।
पुराना फॉर्म-6 गैर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में लागू
अगर बात करें पुराने फॉर्म-6 की तो अतिरिक्त घोषणा पत्र में फॉर्म-6 ऑनलाइन या ऑफलाइन प्रक्रिया के अंतर्गत भरे जाएंगे। पुराने यानी मूल फॉर्म-6 और SIR वाले फॉर्म-6 अर्थात घोषणा पत्र में किसी प्रकार का कोई अंतर नहीं देखा गया है। पुराना फॉर्म-6 गैर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में लागू हो चुका है।
उसमें किसी तरह का अतिरिक्त घोषणा पत्र नहीं मांगा गया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में हर वोटर्स के माता-पिता, दादा-दादी और रिश्तेदार के साथ रिलेशन की पुष्टी कर चुका है। ऐसे में अब फॉर्म-6 भरने वाले नए मतदाता के अभिभावकों का आंकड़ा डिजीटली दर्ज है।
पहले देनी होगी थी जानकारी
शुरुआत में फॉर्म-6 में माता-पिता की जानकारी देना जरूरी था। लेकिन मूल फॉर्म में इसमें नए आवेदकों को यह जानकारी देना आवश्यक नहीं है। फॉर्म-6 में आवेदकों को घोषणा करनी पड़ती थी कि, साल 2000 के शुरुआत में पीछले SIR के दौरान माता पिता या दादा-दादी के नाम मतदाता सूची में दर्ज थे या नहीं।
मतदान क्षेत्र और बूथ संख्या में एक कॉलम अनिवार्य था जिसमें विधानसभा क्षेत्र की संख्या, मतदान केंद्र संख्या देना जरूरी होता है। ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आवेदक को पिछली SIR लिस्ट के हिसाब से परिवार का विधानसभा क्षेत्र नंबर, पोलिंग बूथ नंबर और सीरियल नंबर देना जरूरी था।
पुरानी पारिवारिक मैपिंक से हो सकेगा पंजीकरण
अब व्यक्तिगत जानकारी उम्र, निवास, प्रमाण पत्र अलोड करने फॉर्म सीधे जमा किया जा सकता है। लेकिन यह प्रक्रिया स्वैच्छिक है। ecinet पोर्टल पर इसे भरे बगैर भी फॉर्म आगे सबमिट नहीं होगा। वोटर पात्रतात में पहली बार मतदाता बने युवाओं को पुरानी पारिवारिक मैपिंक के आसानी से पंजीकरण करा सकते हैं। इसमें दस्तावेजीकरण के दौरान समस्याए आ रही थीं। जिन मतदाताओं के नाम पहले कट चुके थे, उन्हें फिर से शामिल होनें में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
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