SIR Protest: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विपक्षी दलों के विरोध के बीच दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने INDIA ब्लॉक पर तीखी टिप्पणी की है। ANI से बातचीत में उन्होंने विपक्ष के प्रदर्शन और चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाए।
जस्टिस ढींगरा ने कहा कि SIR को लेकर जो शोर सुनाई दे रहा है, वह आम मतदाताओं की तरफ से नहीं बल्कि उन राजनीतिक दलों की तरफ से है जो चुनाव नहीं जीत सके। उन्होंने कहा कि अगर किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हट गया है तो उसके पास चुनाव आयोग के सामने शिकायत करने का कानूनी रास्ता मौजूद है।
‘अगर नाम हट गया है तो चुनाव आयोग में शिकायत करें’
जस्टिस ढींगरा ने कहा कि किसी मतदाता को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया है तो वह चुनाव आयोग के सामने अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
SIR को गलत बताना अनुचित
उन्होंने कहा कि SIR को पूरी तरह गलत बताना उचित नहीं है, क्योंकि मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मृत लोगों या अन्य अपात्र नामों की पहचान करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारियों में शामिल है।उनके मुताबिक, चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होता है कि केवल पात्र भारतीय नागरिकों को ही मतदान का अधिकार मिले और मतदाता सूची में जरूरी सुधार किए जाएं।
‘SIR रोकने की मांग का मकसद आयोग को काम करने से रोकना’
विपक्षी दल SIR को वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।जस्टिस ढींगरा ने इन आरोपों से अलग राय रखते हुए कहा कि SIR को ही खत्म करने की मांग करना चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े करने जैसा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की जांच और सुधार चुनावी व्यवस्था का नियमित हिस्सा है।
300 सांसदों की मुलाकात पर भी उठाए सवाल
पूर्व जज ने विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मुलाकात को लेकर हुए विवाद पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि 2025 में भी करीब 300 सांसदों ने चुनाव आयोग से मिलने की मांग की थी, लेकिन आयोग ने इतने बड़े समूह के बजाय सीमित प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कही थी।उनके मुताबिक, विपक्षी दल उस समय भी छोटे प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलने के लिए तैयार नहीं हुए थे।
240 सांसदों का मिलना असंभव
उन्होंने मौजूदा विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि अगर 240 सांसद एक साथ चुनाव आयोग से मिलना चाहते हैं तो आयोग के लिए इतने लोगों को एक साथ बुलाना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि आयोग का अपना कार्यालय और बैठक कक्ष है, इसलिए प्रतिनिधिमंडल को वहीं जाकर मिलना चाहिए।
‘मेमोरेंडम देने की सुविधा भी दी गई थी’
जस्टिस ढींगरा ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने बड़ी संख्या में नेताओं के एक साथ पहुंचने से पैदा होने वाली स्थिति से बचने के लिए विपक्षी प्रतिनिधिमंडल को ज्ञापन सौंपने की अनुमति दी थी।उनके मुताबिक, विपक्ष अगर अपनी शिकायतें दर्ज कराना चाहता था तो वह अधिकृत व्यक्ति के जरिए ज्ञापन दे सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बजाय पूरे घटनाक्रम को प्रदर्शन और मीडिया कवरेज से जोड़ दिया गया।
जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणी पर भी बोले ढींगरा
SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भुइयां की एक सार्वजनिक टिप्पणी का भी जस्टिस ढींगरा ने जिक्र किया। उन्होंने जस्टिस भुइयां की उस टिप्पणी पर सवाल उठाया जिसमें बड़े पैमाने पर नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित होने वाली किसी प्रशासनिक कार्रवाई को संवैधानिक दृष्टि से गंभीर बताया गया था।
मतदाता सूची में सुधार आयोग की जिम्मेदारी
जस्टिस ढींगरा ने कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित किए जाने का निष्कर्ष किस आधार पर निकाला गया। उन्होंने दावा किया कि जिन करोड़ों नामों का जिक्र किया जा रहा है, उनमें बड़ी संख्या में मृत लोगों, दूसरे स्थानों पर चले गए लोगों और एक से ज्यादा जगह वोटर लिस्ट में दर्ज नामों का मामला हो सकता है।उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की जांच और उसमें सुधार करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
'सिटिंग जज को ऐसे मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए’
जस्टिस ढींगरा ने जस्टिस भुइयां की टिप्पणी को न्यायिक आचार से जोड़ते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों के लिए न्यायिक आचरण से जुड़े नियम हैं।उनका दावा है कि किसी सिटिंग जज को लंबित मामलों, भविष्य में अदालत के सामने आने वाले मामलों या ऐसे संवेदनशील राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों पर टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
दिल्ली में जारी है विपक्ष का प्रदर्शन
इस बीच बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसदों को लेकर बसें जंतर-मंतर की ओर रवाना हुईं। विपक्ष SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहा है।वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोका। विपक्षी दल मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग से जवाब और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।