नई दिल्ली: वैश्विक समुद्री व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने अपनी समुद्री क्षमता, बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे और वैकल्पिक व्यापार मार्गों को मजबूत करने पर जोर दिया है। राजधानी दिल्ली में आयोजित 'सागरमंथन: द ग्रेट ओशन्स डायलॉग 2026' के उद्घाटन सत्र में सरकार और उद्योग जगत के दिग्गजों ने वैश्विक समुद्री आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने की जरूरत पर चर्चा की।
तीन दिवसीय इस संवाद का तीसरा संस्करण बुधवार से शुरू हुआ। इसे ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) और केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) संयुक्त रूप से आयोजित कर रहे हैं। कार्यक्रम में 70 से अधिक देशों के 1,200 से ज्यादा मंत्री, नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। इस वर्ष की थीम “Blue Geographies, New Aspirations: Trade, Technology, and Trust at Sea” है।
समुद्री मार्गों में व्यवधान ने बढ़ाई चिंता
सागरमंथन 2026 के पहले दिन की चर्चा में भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु परिवर्तन, सप्लाई चेन में व्यवधान और वैश्विक जहाज निर्माण क्षमता के कुछ देशों में केंद्रित होने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र बंदरगाहों, शिपबिल्डिंग क्लस्टर्स और समुद्री प्रशिक्षण में निवेश के जरिए बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने सरकार की समुद्री योजनाओं को Maritime India Vision 2030 और Maritime Amrit Kaal Vision 2047 से भी जोड़ा।
Strait of Hormuz संकट का भी जिक्र
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने समुद्री मार्गों के सामने मौजूद चुनौतियों पर बात की। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण समुद्री chokepoints पर भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु परिवर्तन और बदलते व्यापार मार्ग नई अनिश्चितताएं पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने हालिया Strait of Hormuz संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि समुद्री मार्गों में व्यवधान का असर केवल संबंधित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाता है।
'Just-in-Time' से 'Just-in-Case' की ओर बढ़ रही सप्लाई चेन
DP World के सब-कॉन्टिनेंट, सेंट्रल एशिया, लेवेंट और मिस्र क्षेत्र के CEO एवं MD रिजवान सोमर ने कहा कि कंपनियां अब केवल अधिकतम दक्षता पर निर्भर रहने के बजाय अपनी सप्लाई चेन में वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने पर ध्यान दे रही हैं।
उनके मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में कारोबारी मॉडल 'Just-in-Time' से 'Just-in-Case' की ओर बढ़ा है। कंपनियों के लिए अब केवल सबसे बेहतर व्यापारिक मार्ग चुनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों के लिए वैकल्पिक मार्ग और योजनाएं तैयार रखना भी जरूरी हो गया है।
भारत के प्रमुख बंदरगाहों का कार्गो हैंडलिंग बढ़ा
कार्यक्रम में भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी चर्चा हुई। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने बताया कि भारत के प्रमुख बंदरगाहों पर संभाले जाने वाले कार्गो में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि 2014-15 में प्रमुख बंदरगाहों पर 581 मिलियन टन कार्गो संभाला जाता था, जो 2025-26 में बढ़कर 915 मिलियन टन से अधिक हो गया है। इस दौरान जहाजों के टर्नअराउंड टाइम में भी 50 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है।
उन्होंने कहा कि निर्माण पूरा होने के बाद वधावन पोर्ट दुनिया के 10 सबसे बड़े बंदरगाहों में शामिल हो सकता है।
जहाज निर्माण और बंदरगाहों में निवेश पर जोर
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री और Asia Society के ग्लोबल प्रेसिडेंट एवं CEO केविन रुड ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देश दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के नजरिए से समुद्री बुनियादी ढांचे को देख रहे हैं।
उन्होंने जहाज निर्माण और बंदरगाहों में निवेश को महत्वपूर्ण बताया और वैश्विक समुद्री बुनियादी ढांचे में अत्यधिक केंद्रीकरण से जुड़े जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया।
समुद्री व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा का कनेक्शन
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने कहा कि समुद्री व्यापार को मिलने वाली चुनौतियों को राष्ट्रीय सुरक्षा से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उनके मुताबिक, दुनिया के किसी एक हिस्से में पैदा होने वाला समुद्री खतरा दूसरे क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक समुद्री क्षेत्र लगातार अधिक विवादित, भीड़भाड़ वाला और प्रतिस्पर्धी होता जा रहा है, जिससे इसका राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंध और महत्वपूर्ण हो जाता है।
India-EU Green Shipping Corridor की शुरुआत
सागरमंथन 2026 के पहले दिन India-EU Green Shipping Corridor की शुरुआत भी हुई। इसके अलावा ग्रीन शिपिंग, टिकाऊ ब्लू इकोनॉमी, भारत-कोरिया समुद्री संबंधों और India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) पर भी चर्चा हुई।
वैकल्पिक व्यापार मार्गों पर बढ़ता जोर इस बात को दर्शाता है कि देश और कंपनियां किसी एक समुद्री chokepoint पर निर्भरता कम करने और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक लचीला बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
'अकेला कोई देश समुद्र को सुरक्षित नहीं कर सकता'
Observer Research Foundation के अध्यक्ष समीर सरन ने समुद्र को वैश्विक साझा बुनियादी ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश अकेले समुद्र की सुरक्षा, शिपिंग का decarbonisation या resilient maritime supply chains तैयार नहीं कर सकता।
सागरमंथन 2026 में अगले दो दिनों तक समुद्री सुरक्षा, ग्रीन शिपिंग, जहाज निर्माण, ब्लू इकोनॉमी, वैश्विक व्यापार के भविष्य और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दों पर चर्चा जारी रहेगी।
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