नई दिल्ली: रक्षाबंधन का त्योहार इस बार सिर्फ भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक ही नहीं, बल्कि व्यापार और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाला बड़ा अवसर भी बन रहा है। व्यापारियों के संगठन कैट (Confederation of All India Traders) के अनुसार, रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली में करीब ₹4,000 करोड़ और देशभर में लगभग ₹30 हजार करोड़ के कारोबार का अनुमान है।

स्थानीय उत्पादों की मांग को बढ़ावा

चांदनी चौक से सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान ने त्योहारों के दौरान स्थानीय उत्पादों की मांग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि अब भारतीय ग्राहक स्थानीय कारीगरों, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे व्यापारियों द्वारा बनाए गए उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

खंडेलवाल के मुताबिक, रक्षाबंधन के अवसर पर राखियों के अलावा मिठाइयां, उपहार सामग्री, कपड़े, सजावटी सामान, सूखे मेवे, इलेक्ट्रॉनिक गिफ्ट, गृह सज्जा उत्पाद और पूजा सामग्री की बिक्री में भी तेजी आई है।

बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़

उन्होंने बताया कि दिल्ली के प्रमुख बाजारों जैसे चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, कमला नगर, लाजपत नगर, गांधी नगर और राजौरी गार्डन में ग्राहकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। बाजारों में त्योहार को लेकर जबरदस्त उत्साह है और व्यापारिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार

कैट महामंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। राखी बनाने वाले कारीगरों, महिला स्वयं सहायता समूहों, मिठाई विक्रेताओं, फूल कारोबारियों, गिफ्ट व्यापारियों, कूरियर कंपनियों और ई-कॉमर्स डिलीवरी नेटवर्क को इस पर्व से विशेष लाभ मिलता है।

इस बार बाजारों में ‘विकसित भारत’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘हर घर तिरंगा’, ‘ऑपरेशन सिंदूर’, ‘ब्रह्मोस’ और भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों पर आधारित राखियों की मांग भी बढ़ी है। इन राखियों को देश के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले भारतीयों तक भी भेजा जा रहा है।

चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के अभियान का असर

खंडेलवाल ने कहा कि कैट द्वारा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के अभियान का असर अब त्योहारों के बाजारों में साफ दिखाई दे रहा है।रक्षाबंधन इसका उदाहरण है, जहां स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को लोगों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के त्योहार अब केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहे, बल्कि वे आर्थिक मजबूती, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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