नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने SIR (मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच युवाओं और छात्रों से कथित पुलिस ज्यादती और गैरकानूनी हिरासत से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी से छीना नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए चेतावनी दी कि लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश करने वालों को न्याय का सामना करना पड़ेगा।

'पुलिस ज्यादती के वीडियो और तस्वीरें सुरक्षित रखें'

राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि जिन छात्रों और युवाओं को कथित पुलिस बर्बरता या गैरकानूनी हिरासत का सामना करना पड़ा है, वे घटनाओं का पूरा रिकॉर्ड रखें। उन्होंने वीडियो और तस्वीरों को अहम सबूत बताते हुए युवाओं से इन्हें सुरक्षित रखने की अपील की।

राहुल गांधी ने लिखा कि लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश करने वालों को एक दिन न्याय का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार या कोई भी अन्य व्यक्ति शामिल हो, कानून के तहत जवाबदेही तय होनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और उनकी पार्टी इस अधिकार को छीनने नहीं देगी।

NSUI कार्यकर्ताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस पर लगाए आरोप

इससे पहले राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट का आरोप लगाने वाले NSUI कार्यकर्ताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोगों की आवाज को धर्म, जाति या लिंग के आधार पर नहीं बांटा जा सकता।

राहुल गांधी ने कहा कि यह भारत की आवाज है और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री को इसके खिलाफ खड़े होने से बचना चाहिए। उन्होंने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों को कथित ज्यादती की वीडियो रिकॉर्डिंग करने और सबूत कांग्रेस तक पहुंचाने के लिए कहा गया है।

राहुल गांधी ने दावा किया कि मामले के निष्कर्ष तक पहुंचने के बाद इन सबूतों का इस्तेमाल किया जाएगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जवाबदेही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार से लेकर कथित तौर पर छात्रों पर हाथ उठाने वाले पुलिसकर्मियों तक तय होनी चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट में NSUI की याचिका पर सुनवाई

इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और आम लोगों पर कथित हमले की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। याचिका NSUI के एक पदाधिकारी ने दायर की थी।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका की सुनवाई योग्य होने पर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट के जनहित याचिका नियम, 2010 के तहत कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन NSUI के साथ अपने संबंध का खुलासा नहीं किया है।

अदालत ने दिल्ली पुलिस को याचिका की सुनवाई योग्य होने पर शुरुआती आपत्तियां दर्ज करने के लिए तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी। मामले पर अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होनी है।

SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर सियासी टकराव

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। INDIA गठबंधन के नेताओं ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की है।

याचिका में न्यायिक फैसला आने तक SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और इसके क्रियान्वयन की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है।

इस बीच राहुल गांधी की ताजा अपील ने कथित पुलिस कार्रवाई, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रदर्शनकारियों की जवाबदेही से जुड़े सबूतों को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

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