नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बीच संघ-भाजपा से संबद्ध व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखकर त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है।

भाजपा से जुड़े व्यापारिक संगठनों का कहना है कि नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान कारोबार में तेजी रहती है। ऐसे में विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम, पुलिस बैरिकेडिंग और बाजारों तक पहुंच में बाधा से व्यापारियों, कर्मचारियों, छोटे कारोबारियों और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। कई संगठनों ने राहुल गांधी से प्रदर्शन के समय और तरीके पर पुनर्विचार करने की अपील की है, जबकि कुछ ने केंद्र सरकार और न्यायपालिका से व्यावसायिक गतिविधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

'राजनीतिक विवाद में व्यापारियों को नुकसान न हो'

दिल्ली प्रदेश भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष नवीन गर्ग ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर बाजारों में अनिश्चितता को लेकर चिंता जताई। संगठन ने कहा कि त्योहारों का मौसम देश के व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी दौर में से एक है। करोड़ों व्यापारियों, कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका सामान्य व्यापारिक गतिविधियों पर निर्भर करती है।

संगठन ने आशंका जताई कि प्रदर्शनों के कारण भय और अनिश्चितता का माहौल बनने, दुकानों को नुकसान पहुंचने या एहतियातन बाजार बंद होने से व्यापार प्रभावित हो सकता है। उसने राहुल गांधी से प्रदर्शन समाप्त करने और बाजारों में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कदम उठाने की अपील की।

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल ने भी राजनीतिक प्रदर्शनों के आर्थिक प्रभाव पर चिंता जताई। संगठन का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों की कीमत व्यापारियों को नहीं चुकानी चाहिए। उसने चेतावनी दी कि यदि व्यापारिक हित प्रभावित होते रहे, तो व्यापारी भी शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन कर सकते हैं।

FTII ने कहा- त्योहारों के कारोबार को राजनीतिक विवाद की भेंट न चढ़ाएं

फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FTII) ने राहुल गांधी से SIR के खिलाफ आंदोलन के समय और तरीके पर पुनर्विचार करने की मांग की। संगठन ने कहा कि त्योहारों के दौरान ग्राहकों की आवाजाही और कारोबार में गिरावट से छोटे दुकानदारों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

फेडरेशन ने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि हजारों छोटे व्यापारियों और श्रमिकों का भविष्य त्योहारों के कारोबार पर निर्भर करता है। संगठन ने राहुल गांधी से त्योहारों के दौरान सड़कों पर होने वाले आंदोलन को रोककर राजनीतिक मांगों को बातचीत, ज्ञापन और कानूनी माध्यमों से उठाने की अपील की।

इंडियन रिकवर्ड पेपर ट्रेडर्स एसोसिएशन (IRPTA) ने भी बाजारों में संभावित व्यवधान को लेकर चिंता जताई और ऐसे प्रदर्शनों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया, जिनसे व्यापारिक गतिविधियां बाधित हो सकती हैं।

जयपुर व्यापार महासंघ ने PM मोदी को भी लिखा पत्र

राजस्थान में जयपुर व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुभाष गोयल ने 12 अक्टूबर को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रदर्शनों से छोटे दुकानदारों और कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित हो रही है। संगठन ने प्रदर्शनों को तत्काल रोकने की मांग करते हुए कहा कि व्यापारिक हितों को लगातार नुकसान पहुंचने पर व्यापारी चुप नहीं बैठेंगे।

महासंघ ने 13 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखकर व्यापारिक केंद्रों की सुरक्षा और कारोबार, रोजगार तथा निवेश को बाधित होने से बचाने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया। संगठन ने मुख्य न्यायाधीश को भी पत्र भेजकर ऐसी कानूनी सुरक्षा की मांग की, जिससे राजनीतिक प्रदर्शनों के कारण वैध व्यापारिक गतिविधियों में बाधा न आए।

दिल्ली के कई बाजार संगठनों ने उठाई सुरक्षा की मांग

दिल्ली के कई व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर बाजारों में जबरन बंदी, सड़क जाम और ग्राहकों तथा सामान की आवाजाही में बाधा रोकने के लिए प्रशासनिक और कानूनी उपाय करने की मांग की।

इनमें नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन, ईस्ट पंजाबी बाग मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन, सेंट्रल ओल्ड मार्केट तिलक नगर एसोसिएशन, रेवाड़ी लाइन स्मॉल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन, मायापुरी इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन, नई सड़क ट्रेडर्स एसोसिएशन, मोहन सिंह प्लेस ट्रेडर्स एसोसिएशन, नारायणा स्मॉल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन, आयरन मर्चेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, ग्रीन पार्क एक्सटेंशन मार्केट एसोसिएशन, जनपथ ट्रेडर्स एसोसिएशन और चावड़ी बाजार हार्डवेयर एसोसिएशन शामिल हैं।

इन संगठनों ने कहा कि व्यापारिक गतिविधियां रोजगार, औद्योगिक उत्पादन और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बाजारों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को बाधाओं से बचाने तथा व्यापारियों, कर्मचारियों और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

मुख्य न्यायाधीश से भी हस्तक्षेप की मांग

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (FAIDA) ने 12 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर व्यापारिक केंद्रों और अर्थव्यवस्था पर प्रदर्शनों के कथित प्रभाव को लेकर चिंता जताई। राष्ट्रीय अध्यक्ष सीएच कृष्णा के हस्ताक्षर वाले पत्र में संगठन ने आरोप लगाया कि त्योहारों के दौरान प्रमुख सड़कों, सार्वजनिक परिवहन और बाजारों को बाधित करना लोकतांत्रिक अधिकारों का दुरुपयोग है।

FAIDA ने सुप्रीम कोर्ट से व्यापारिक मार्गों को बाधाओं से मुक्त कराने और प्रदर्शनों को निर्धारित गैर-व्यावसायिक स्थानों तक सीमित करने के लिए निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।

बेंगलुरु होलसेल क्लॉथ मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रकाश पिरगल ने भी मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर व्यापारियों को कानूनी सुरक्षा देने की मांग की। संगठन ने कहा कि कई पारिवारिक कारोबार त्योहारों के लिए बड़ी मात्रा में माल खरीदते हैं। कारोबार बाधित होने से उनके निवेश की वसूली और आजीविका पर असर पड़ सकता है।

महिला व्यापार महासंघ संस्थान ने 13 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर महिला उद्यमियों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों की समस्याएं उठाईं। संगठन ने कहा कि त्योहारों के दौरान होने वाली बिक्री महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों के लिए विशेष महत्व रखती है।

नरेला फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन ने भी प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर औद्योगिक गतिविधियों, खाद्य प्रसंस्करण और आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित रखने की मांग की। दिल्ली की दाल एवं बेसन मिलर्स एसोसिएशन ने भी कारोबार और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप का अनुरोध किया।

केरल के व्यापारिक संगठन ने भी जताई चिंता

केरल के कालीकट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बाजारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और प्रमुख परिवहन मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। संगठन की ओर से सचिव डॉ. बॉबिश कुन्नाथ ने पत्र में कहा कि व्यापारिक गतिविधियों में बाधा से आर्थिक नुकसान, कर्मचारियों और उपभोक्ताओं पर असर तथा सामान की आवाजाही में व्यवधान हो सकता है।

चैंबर ने केंद्र सरकार से संबंधित अधिकारियों के लिए उचित दिशानिर्देश जारी करने का अनुरोध किया, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करते हुए वैध आर्थिक गतिविधियां भी निर्बाध रूप से जारी रह सकें।

दिल्ली के खान मार्केट में कारोबार प्रभावित होने का दावा

दिल्ली में भी व्यापारियों ने SIR के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शनों के बीच पुलिस बैरिकेडिंग और बाजार तक पहुंच में प्रतिबंधों के कारण कारोबार प्रभावित होने का आरोप लगाया है।

खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने ANI से कहा कि बाजार से करीब एक किलोमीटर पहले से ही पुलिस बैरिकेडिंग शुरू हो जाती है, जिससे ग्राहकों को वहां पहुंचने में परेशानी होती है। उनके मुताबिक, कारोबार सामान्य स्तर के केवल 10 से 20 प्रतिशत तक रह गया है। उन्होंने कहा कि ग्राहक रास्ते में आने वाली बाधाओं और प्रदर्शन के दौरान हिंसा की आशंका के कारण बाजार आने से बच रहे हैं।

हालांकि, विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने कारोबार में गिरावट और आजीविका पर असर की आशंका जताई है, लेकिन उनके पत्रों में आर्थिक नुकसान का स्वतंत्र रूप से सत्यापित कुल आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी है विरोध

SIR को लेकर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन जारी है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। इससे पहले INDIA गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था और SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।

याचिका में मामले पर न्यायिक निर्णय होने तक जारी SIR प्रक्रिया को स्थगित करने और इसके क्रियान्वयन की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है।

व्यापारिक संगठनों की मांगों के बीच अब सवाल यह है कि राजनीतिक विरोध और व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने के लिए केंद्र सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका क्या कदम उठाते हैं।

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