कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका इन दिनों चर्चा में हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन करने पहुंचे इन नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था,बाद में अदालत ने उन्हें शर्तों के साथ रिहा कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक सवाल भी उठ रहा है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो रहे इस आंदोलन के नेताओं की कमाई का जरिया क्या है और उनके प्रदर्शन का खर्च कौन उठा रहा है?

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इन तीनों का पेशेवर बैकग्राउंड अलग-अलग है। कोई राजनीतिक कम्युनिकेशन और पत्रकारिता से जुड़ा रहा है, तो किसी को खोजी पत्रकारिता (Investigative journalism) अनुभव है। वहीं, एक नेता ने कंसल्टिंग के क्षेत्र में भी काम किया है। हालांकि, तीनों की मौजूदा सैलरी और कुल कमाई का कोई पक्का आंकड़ा सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। आंदोलन के लिए मिलने वाली मदद और उनकी निजी कमाई को भी अलग-अलग समझना जरूरी है।

अभिजीत दीपके की कमाई कहां से होती है?

अभिजीत दीपके को कॉकरोच जनता पार्टी का संस्थापक है, उनकी पढ़ाई और काम का अनुभव राजनीतिक कम्युनिकेशन और मीडिया से जुड़ा रहा है, उन्होंने अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर डिग्री हासिल की है, उनकी पढ़ाई का खर्च स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के जरिए पूरा हुआ था।

कॉकरोच जनता पार्टी शुरू करने से पहले अभिजीत आम आदमी पार्टी की डिजिटल मीडिया टीम के साथ काम कर चुके हैं, इसके अलावा, वह दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में कम्युनिकेशन सलाहकार की भूमिका भी निभा चुके हैं। इस अनुभव से पता चलता है कि उनका काम राजनीतिक संचार और मीडिया के क्षेत्र में रहा है, लेकिन वह फिलहाल किस काम से कितनी कमाई कर रहे हैं, उनकी महीने की सैलरी कितनी है या उनकी कुल संपत्ति कितनी है, इसका कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनकी पुरानी नौकरियों को उनकी मौजूदा कमाई का पक्का स्रोत नहीं माना जा सकता।

सौरभ दास पत्रकारिता से करते हैं कमाई?

सौरभ दास को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता के रूम देखा जाता है। वह स्वतंत्र खोजी पत्रकार और सूचना का अधिकार यानी आरटीआई कार्यकर्ता के तौर पर काम करते हैं, उनकी कमाई का संभावित पेशेवर आधार पत्रकारिता, मीडिया के लिए लेखन और रिपोर्टिंग से जुड़ा है। हालांकि, उनकी मौजूदा आमदनी कितनी है और वह किन-किन माध्यमों से नियमित रूप से पैसा कमाते हैं, इसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं है।

वहीं, संगठन की फंडिंग को लेकर सौरभ दास ने बताया है कि आंदोलन के शुरुआती दौर में सदस्य अपनी निजी बचत और कमाई के सहारे खर्च चला रहे थे,यानी शुरुआती गतिविधियों के लिए सदस्यों ने अपने संसाधनों का इस्तेमाल किया, लेकिन नेताओं ने खुद कितनी रकम खर्च की या उनकी निजी कमाई कितनी है, इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं दिया है।

आशुतोष रांका की कमाई का क्या है जरिया?

आशुतोष रांका भी इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। वह आईआईटी कानपुर से पढ़े हैं और लंदन में मैकिन्से में कंसल्टेंट के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा, वह दिल्ली असेंबली फेलोशिप और राजस्थान में जनहित से जुड़े कामों से भी जुड़े रहे हैं, उनकी शिक्षा और पुराने पेशेवर अनुभव से उनके करियर की जानकारी मिलती है, लेकिन वह अभी किस पद पर काम कर रहे हैं, उनकी मौजूदा सैलरी कितनी है या उनकी कुल संपत्ति कितनी है, इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि वह फिलहाल वही कीतना कमा रहे हैं, वहीं, अभी न कि उनकी मौजूदा नौकरी का प्रमाण।

आखिर कहां से मिल रही है कॉकरोच जनता पार्टी को फंडिंग ?

तीनों नेताओं की निजी कमाई के अलावा ये सवाल यह है कि आंदोलन का खर्च कैसे उठाया जा रहा है। इसपर संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया है कि शुरुआत में उन्होंने अपने और दोस्तों के संसाधनों की मदद से आंदोलन का खर्च जुटाया। शुरुआती प्रदर्शनों में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भी सहयोग किया।

वहीं, संगठन की फंडिंग को लेकर सामने आई जानकारी में कुछ प्रमुख बातें हैं:

  • निजी बचत और कमाई: शुरुआती दौर में आंदोलन से जुड़े सदस्यों ने अपनी जेब से खर्च उठाया।
  • दोस्तों और शुभचिंतकों की मदद: स्थापक के मुताबिक, दोस्तों की आर्थिक मदद से भी आंदोलन को आगे बढ़ाने में सहारा मिला।
  • आम लोगों का सहयोग: नेताओं के बयानों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान डोनेशन बॉक्स के जरिए स्वैच्छिक योगदान लिया जाता है साथ ही लोगों से छोटी रकम की मदद मिलने की बात भी कही गई है।
  • क्राउडफंडिंग की योजना: अभिजीत दीपके ने बताया है कि संगठन की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बाद क्राउडफंडिंग के जरिए पैसा जुटाने की योजना है।

दीपके ने यह भी कहा है कि संगठन को किसी बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। विदेशी फंडिंग को लेकर भी संगठन की ओर से इनकार किया गया है। ये बातें नेताओं के अपने बयान हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित वित्तीय रिकॉर्ड के बराबर नहीं माना जा सकता।

क्या संगठन के पास बैंक अकाउंट और फंडिंग का है पूरा हिसाब?

यही इस पूरे मामले का अहम पहलू है। नेताओं के बयानों में संगठन के बैंक खाते और विदेशी फंडिंग को लेकर जो जानकारी सामने आई है, उसके साथ विस्तृत वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। अभिजीत दीपके ने संगठन के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चलने और उसके बाद क्राउडफंडिंग शुरू करने की बात कही है। ऐसे में संगठन की मौजूदा कानूनी स्थिति, उसके नाम पर बैंक खाते की स्थिति और अब तक जुटाई गई रकम को लेकर स्पष्ट जानकारी के लिए आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत होगी।

फिलहाल सार्वजनिक रिपोर्टों में यह साफ नहीं है कि आंदोलन पर कुल कितना पैसा खर्च हुआ, डोनेशन बॉक्स से कितनी रकम मिली, कितने लोगों ने आर्थिक मदद की और अलग-अलग मदों में कितना खर्च किया गया। इसलिए यह कहा नहीं जा सकता है कि संगठन को किसी खास व्यक्ति, कंपनी या राजनीतिक दल से गुप्त फंडिंग मिल रही है।

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निजी कमाई और आंदोलन की फंडिंग में फर्क समझना जरूरी

कॉकरोच जनता पार्टी के तीनों प्रमुख चेहरों का पेशेवर अनुभव उनके काम के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ा रहा है। अभिजीत दीपके का अनुभव राजनीतिक कम्युनिकेशन और मीडिया में है, सौरभ दास पत्रकारिता और आरटीआई से जुड़े हैं, जबकि आशुतोष रांका के पास कंसल्टिंग और जनहित के कामों का अनुभव है।

जहां तक आंदोलन के खर्च की बात है, नेताओं के मुताबिक शुरुआती दौर में निजी बचत, दोस्तों की मदद और आम लोगों के स्वैच्छिक योगदान से काम चलाया गया। आगे क्राउडफंडिंग के जरिए पैसा जुटाने की योजना भी बताई गई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बाकी है की तीनों नेताओं की मौजूदा कमाई कितनी है और कॉकरोच जनता पार्टी को अब तक कुल कितना चंदा मिला है। बात दें कि सार्वजनिक जानकारी में इन दोनों सवालों का कोई प्रमाणित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।