नई दिल्ली: NCERT की कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में सिख गुरुओं के संघर्ष और बलिदान को लेकर विस्तृत चर्चा की गई है। किताब के अध्याय “Resistance and Resilience (1000–1700 CE)” में गुरु अर्जन देव, गुरु तेग बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह के समय की घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

पुस्तक में कहा गया है कि सिख गुरुओं के प्रति मुगल शासन की कठोर कार्रवाई, खासकर गुरु अर्जन देव, गुरु तेग बहादुर और दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह के संदर्भ में, इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल रही है।

NCERT की किताब के अनुसार, सिख गुरुओं के “साहस और बलिदान” ने सिख परंपरा को मजबूत किया और उनके संघर्षों ने समुदाय में अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ दृढ़ता की भावना को बढ़ाया।

गुरु अर्जन देव और गुरु तेग बहादुर का उल्लेख

पुस्तक में बताया गया है कि 17वीं शताब्दी की शुरुआत में सिख गुरुओं के बढ़ते सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव के कारण मुगल शासन का हस्तक्षेप बढ़ा। किताब के अनुसार, मुगल बादशाह जहांगीर के शासनकाल में पांचवें सिख गुरु गुरु अर्जन देव को फांसी दी गई। NCERT ने इसे सिख इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया है।

वहीं, नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर के बारे में किताब में लिखा गया है कि 1675 में औरंगजेब के आदेश पर उनका निष्पादन हुआ, जिसे भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना बताया गया है।

सिख प्रतिरोध और संगठन का जिक्र

NCERT की किताब में बताया गया है कि सिख गुरुओं के बलिदान के बाद समुदाय में संगठित प्रतिरोध की भावना मजबूत हुई। इसमें गुरु हरगोबिंद द्वारा अकाल तख्त की स्थापना और मीरी-पीरी की अवधारणा का भी उल्लेख किया गया है।

जाट विद्रोह का भी पहली बार विस्तृत उल्लेख

नई किताब में गंगा-जमुना दोआब के जाट किसानों के मुगल शासन के खिलाफ संघर्ष का भी जिक्र किया गया है। NCERT के अनुसार, 17वीं शताब्दी में जाट समुदाय पर भारी कर और शोषण का दबाव था, जिसके कारण असंतोष बढ़ा। किताब में 1669 में गोकुल जाट के नेतृत्व में हुए विद्रोह और 1686 में हुए दूसरे बड़े संघर्ष का उल्लेख किया गया है।

अन्य ऐतिहासिक प्रतिरोधों को भी जगह

अध्याय में हिंदू शाही शासकों, चंदेलों, सोलंकियों, चौहानों, महाराणा प्रताप, अहोमों की सरायघाट की लड़ाई और रानी नायकी देवी, रानी अबक्का चौटा तथा रुद्रमा देवी जैसे शासकों के संघर्षों का भी वर्णन किया गया है।

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