नई दिल्ली। असम का मशहूर काजीरंगा नेशनल पार्क 2026-27 के पर्यटन सीजन के लिए पर्यटकों के लिए फिर से खोल दिया गया है। पार्क के दोबारा खुलने के साथ ही जीप सफारी शुरू हो गई है, जबकि हाथी सफारी को अगले 10 से 20 दिनों में शुरू किए जाने की उम्मीद है।

असम के वन मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने शनिवार को कोहोरा रेंज में पार्क के नए पर्यटन सीजन की औपचारिक शुरुआत की। इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों के साथ मंत्री अतुल बोरा और सांसद कामाख्या प्रसाद तासा भी मौजूद रहे।
जीप सफारी शुरू, हाथी सफारी का इंतजार
काजीरंगा में फिलहाल जीप सफारी शुरू हो चुकी है। वहीं, हाथी सफारी के लिए पर्यटकों को कुछ और दिन इंतजार करना होगा। वन मंत्री के मुताबिक, जरूरी तैयारियां पूरी होने के बाद अगले 10 से 20 दिनों में हाथी सफारी शुरू होने की संभावना है।

सरकार को इस पर्यटन सीजन में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। मंत्री ने बताया कि शुरुआती बुकिंग के रुझान उत्साहजनक हैं और उम्मीद है कि इस बार पिछले सीजन के मुकाबले ज्यादा पर्यटक काजीरंगा पहुंचेंगे।
नए टूरिज्म सर्किट विकसित करने की तैयारी
असम सरकार काजीरंगा के आसपास नए पर्यटन सर्किट और आकर्षण विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को सिर्फ एक दिन की यात्रा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें 2 से 4 दिन तक इस क्षेत्र में ठहरने के लिए आकर्षित करना है।

इसके लिए वन विभाग और पर्यटन विभाग मिलकर बुनियादी ढांचे और मौजूदा पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ नए आकर्षण विकसित करने पर काम करेंगे। इससे स्थानीय समुदायों के लिए पर्यटन के जरिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
गैंडे, बाघ और हाथियों का दीदार
ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क असम के गोलाघाट, सोनितपुर, बिश्वनाथ और नगांव जिलों तक फैला हुआ है। यहां ऊंची हाथी घास, आर्द्रभूमि, जंगल और कई बील मौजूद हैं, जो इसे वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं।
काजीरंगा अपने एक सींग वाले गैंडे के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहां एशियाई हाथी, जंगली भैंसे, दलदली हिरण, बाघ और फिशिंग कैट जैसी कई प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
वन्यजीवों को देखने के लिए पार्क में जीप और हाथी सफारी के अलावा सोहोला, मिहिमुख, कठपारा, फोलियामारी और हरमोती में ऑब्जर्वेशन टावर भी मौजूद हैं।
पर्यटन के साथ संरक्षण पर भी जोर
काजीरंगा को पर्यटन के साथ-साथ उसके पारिस्थितिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वन मंत्री ने बढ़ते पर्यटन के बीच पार्क के पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने गैंडे के शिकार में कमी लाने के लिए सरकार की ओर से किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया।
काजीरंगा के आसपास पर्यटन का दायरा अब सिर्फ सफारी तक सीमित नहीं है। दुर्गापुर गांव में स्थित काजीरंगा नेशनल ऑर्किड एंड बायोडायवर्सिटी पार्क भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। यहां 500 से अधिक प्रजातियों के ऑर्किड के अलावा फल-सब्जियों, बांस, बेंत और स्थानीय मछलियों की विभिन्न प्रजातियां मौजूद हैं।
असम सरकार अब काजीरंगा के इस पूरे पर्यटन इकोसिस्टम को विकसित कर पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
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